यूनिक समय, नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET' पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत से एक बड़ी ख़बर सामने आ रही है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की मुख्य आरोपियों में से एक मनीषा वाघमारे को फिलहाल किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहस सुनने के बाद मनीषा वाघमारे की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, इसी प्रकरण के एक अन्य आरोपी यश यादव ने अपनी आगामी नीट परीक्षा और बहन की शादी का हवाला देते हुए अदालत से अंतरिम राहत की गुहार लगाई है। बचाव पक्ष का दावा सुनवाई के दौरान मनीषा वाघमारे के कानूनी वकील ने अदालत के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए दलील दी कि उनकी मुवक्किल एक प्रामाणिक और सर्टिफाइड एजुकेशन काउंसलर हैं। वे छात्रों को करियर गाइडेंस देने का वैध काम करती हैं और उन्हें इस काउंसलिंग के एवज में नियमित रूप से वैध फीस प्राप्त होती रहती है। सीबीआई द्वारा बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन के आरोपों पर सफाई देते हुए वकील ने दावा किया कि जांच एजेंसी जिस बैंक एंट्री का बार-बार जिक्र कर रही है, वह वास्तव में करीब 3।50 लाख रुपये की राशि है, जो मनीषा के पास उनकी पैतृक संपत्ति की एक 'गिफ्ट डीड' के माध्यम से कानूनी रूप से आई थी। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मनीषा वाघमारे के बैंक खाते में ऐसा कोई भी अवैध सबूत या ट्रेल नहीं मिला है जिसके आधार पर उन्हें सलाखों के पीछे रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट को यह भी याद दिलाया कि सीबीआई ने मनीषा के आवास पर दो बार सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन दोनों ही बार एजेंसी को वहां से एक भी रुपया या कोई संदिग्ध नकदी बरामद नहीं हुई। CBI ने खोली कुंडली इसके विपरीत, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के सरकारी वकील ने मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका का बेहद कड़ा और पुरजोर विरोध किया। जांच एजेंसी ने कोर्ट में मनीषा की असल भूमिका का खुलासा करते हुए कहा कि वह खुद को भले ही एक सर्टिफाइड एजुकेटर और काउंसलर बताती हैं, लेकिन असल में वह एक ब्यूटी पार्लर का संचालन भी करती हैं, जिसकी आड़ में यह पूरा खेल चल रहा था। CBI के पुख्ता आरोपों के अनुसार, मनीषा ने नीट परीक्षा के केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान), बायोलॉजी (जीव विज्ञान) और फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) के लीक शुदा प्रश्नपत्र लोखंडे नामक व्यक्ति को लीक किए थे, जो बाद में शुभम नाम के आरोपी तक पहुंचे। जांच एजेंसी ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि वह मोटी रकम वसूल कर कई छात्रों को NEET परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र और उत्तर पहले ही उपलब्ध कराती थीं। सीबीआई ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसके पास ऐसे कई पीड़ित और गवाह छात्रों के धारा-164 के तहत दर्ज बयान मौजूद हैं, जिन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने पेपर हासिल करने के बदले मनीषा वाघमारे को मोटी रकम दी थी। इन गंभीर दलीलों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने मनीषा की याचिका को खारिज कर दिया। आरोपी यश यादव की अंतरिम जमानत याचिका पर 12 जून को होगा फैसला इसी हाईप्रोफाइल पेपर लीक मामले में नामजद एक अन्य आरोपी यश यादव ने भी राहत के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यश यादव ने अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में 15 दिनों की अस्थायी (अंतरिम) जमानत की अर्जी दाखिल की है। यश ने अपनी अर्जी में मानवीय आधार पर दो मुख्य कारण बताते हुए कहा है कि आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली NEET परीक्षा में उन्हें खुद एक अभ्यर्थी के रूप में शामिल होना है, और इसके साथ ही उनके घर में उनकी सगी बहन की शादी का कार्यक्रम है, जिसमें उनका शामिल होना बेहद जरूरी है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने यश यादव की इस अंतरिम जमानत याचिका पर संज्ञान लेते हुए फिलहाल सीबीआई को नोटिस जारी कर इस पर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने इस अर्जी पर अगली सुनवाई के लिए आगामी 12 जून की तारीख तय की है। सीबीआई का आरोप है कि यश यादव का संबंध सीधे तौर पर नीट परीक्षा से जुड़े लीक प्रश्नपत्रों को सिंडिकेट के जरिए आगे बांटने (डिस्ट्रीब्यूशन) से रहा है। ऐसे में अब 21 जून को होने वाली परीक्षा से पहले यश यादव को जेल से 15 दिनों की आजादी मिलेगी या नहीं, इसका फैसला 12 जून की सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगा।