यूनिक समय, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को पार्श्व एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष, यह एकादशी 3 सितंबर को मनाई जाएगी। परिवर्तिनी एकादशी का मुहूर्त और पूजा विधि वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 3 सितंबर को देर रात 3:53 बजे होगी और इसका समापन 4 सितंबर को सुबह 4:21 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि का महत्व है, इसलिए व्रत 3 सितंबर को ही रखा जाएगा। पूजा विधि: व्रत से एक दिन पहले, यानी दशमी तिथि को, सूर्यास्त के बाद भोजन न करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोएं। एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा करें। उन्हें तुलसी, ऋतु फल और तिल अर्पित करें। इस दिन अन्न का सेवन न करें, और शाम की पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें। परिवर्तिनी एकादशी पर दान का महत्व इस दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अनाज और भोजन: जरूरतमंदों को अनाज और भोजन दान करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। पीले वस्त्र: भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इस रंग के वस्त्र दान करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और आर्थिक संकट दूर होते हैं। फल, तिल और घी: मौसमी फल दान करने से अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। तिल का दान शनि दोष से मुक्ति दिलाता है, जबकि घी और शहद का दान घर में खुशहाली और मिठास लाता है। गाय: गो-दान सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। यदि आप गाय दान नहीं कर सकते, तो गाय को चारा खिलाकर भी पुण्य कमा सकते हैं। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। ये भी पढ़ें: Bajaj Finance Share Price: बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी, सेंसेक्स में भी उछाल