Fri, Jun 19th, 2026
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Ram Mandir Dispute: आज सीएम योगी का अयोध्या दौरा; रामलला के दर्शन-पूजन करे सुरक्षा व्यवस्थाओं का लेंगे जायजा

by Tarun Bhardwaj • June 19, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए करोड़ों रुपये के चढ़ावा चोरी विवाद ने अब बेहद गंभीर और राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद और सियासी घमासान के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शुक्रवार को अयोध्या के दौरे पर जा रहे हैं, जहाँ वह रामलला के दर्शन-पूजन करेंगे और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। लेकिन इस दौरे से जुड़ी सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति और महासचिव चंपत राय को सीएम के इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएम के प्रोटोकॉल लेटर में बड़ा निर्देश

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे को लेकर जो आधिकारिक प्रोटोकॉल लेटर जारी किया गया है, उसमें चंपत राय को लेकर एक बेहद अप्रत्याशित और बड़ा निर्देश शामिल है। इस सरकारी लेटर के पॉइंट नंबर 29 में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से स्पष्ट अनुरोध किया गया है कि वे मुख्यमंत्री के राम मंदिर कार्यक्रम के दौरान खुद उपस्थित रहने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को अपना अधिकृत प्रतिनिधि नामित करें और इसकी लिखित सूचना तुरंत ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराएं।

आपको बता दें कि चंपत राय राम मंदिर परिसर के सबसे पावरफुल शख्स माने जाते हैं और पूरे मंदिर प्रबंधन की कमान उन्हीं के हाथों में रही है। अब तक मंदिर में जब भी कोई वीआईपी कार्यक्रम या प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का दौरा हुआ है, चंपत राय हमेशा उनके साथ अग्रिम पंक्ति में मौजूद रहे हैं। ऐसे में प्रशासन का यह कदम मंदिर के भीतर मचे आंतरिक घमासान और बड़ी कार्रवाई की ओर इशारा कर रहा है।

एसआईटी (SIT) की बड़ी कार्रवाई

चढ़ावा चोरी के इस महाघोटाले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंदिर परिसर में अपना शिकंजा बेहद कस दिया है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन एसआईटी की टीम तड़के सवेरे 8:30 बजे ही राम मंदिर पहुंच गई। सूत्रों के अनुसार, दान राशि की गिनती और उस काम में दागी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य डॉ। अनिल मिश्र से कड़े सवाल-जवाब किए हैं।

इसके अलावा, एसआईटी की रडार पर पिछले 20 वर्षों से राम मंदिर में तैनात रेडियो प्रचार निरीक्षक (RMO) अर्जुन सिंह और राम जन्मभूमि चौकी प्रभारी भी हैं। अर्जुन सिंह मंदिर में वीआईपी दर्शन से लेकर तमाम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सबसे पुराने गवाह रहे हैं। एसआईटी पिछले 3 दिनों में मंदिर के करीब 100 छोटे-बड़े कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है और बीते 11 महीनों के वित्तीय दस्तावेजों, दान पेटियों के रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रही है।

काशी की तर्ज पर CEO की हो सकती है नियुक्ति

इस मामले में अब तक दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े 5 मुख्य आरोपियों—लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर पुलिस और जांच टीमों ने करीब 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद कर ली है।

इस भारी अव्यवस्था और बदनामी के बाद अब सरकार और ट्रस्ट राम मंदिर की प्रशासनिक कमान को अपने हाथ में लेने का मन बना चुकी है। सूत्रों का कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर अब अयोध्या राम मंदिर में भी एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की स्थायी नियुक्ति की जा सकती है। यह सीईओ रैंक का अधिकारी कोई सीनियर आईएएस (IAS) अफसर होगा, जो ट्रस्ट के अंतर्गत मंदिर की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं के फैसले स्वतंत्र रूप से लेगा।

कांग्रेस और सपा का तीखा हमला

इस पूरे विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह सुलग उठी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय गुरुवार को खुद अयोध्या पहुंचे और भाजपा व ट्रस्ट पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा के लोग भगवान के चढ़ावे की चोरी कर रहे हैं और इसमें बेहद बड़े लोग शामिल हैं। यह असल में चोरी के हिस्से के बंटवारे की आपसी लड़ाई है। यहाँ तक कि मंदिर से सोने की ईंटें भी गायब हैं और सरकार इस महापाप को दबाने की कोशिश कर रही है। चंपत राय और गोपाल राव को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और इस मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज से होनी चाहिए।”

इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने रविवार 7 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि राम मंदिर से 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपये तक की नगदी चोरी की गई है, जिस पर अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी को संदिग्ध बताते हुए कोर्ट से दखल की मांग की थी। विवाद को बढ़ता देख भाजपा नेता डॉ। रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई (CBI) जांच की मांग की थी, जिसके ठीक अगले दिन 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली थी।

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