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सोमनाथ अमृत पर्व-2026: पीएम मोदी ने 11 पवित्र तीर्थों के जल से किया 90 मीटर ऊंचे शिखर का कुंभाभिषेक

by Tarun Bhardwaj • May 11, 2026
PM Modi performed the Kumbhabhishekam of the spire using water from 11 sacred pilgrimage sites

सोमनाथ अमृत पर्व-2026: पीएम मोदी ने 11 पवित्र तीर्थों के जल से किया 90 मीटर ऊंचे शिखर का कुंभाभिषेक

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यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत की आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण के प्रतीक, प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर में आज एक नया इतिहास रचा गया। मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत पर्व-2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस दौरान मंदिर के भव्य शिखर पर पहली बार दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार ‘कुंभाभिषेक’ किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा।

1.86 मीट्रिक टन के कलश से शिखर का अभिषेक

समारोह का सबसे अद्भुत हिस्सा मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर का अभिषेक था। इसके लिए तकनीकी और धार्मिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अनुष्ठान के लिए 760 किलोग्राम वजनी और 8 फीट ऊंचा विशेष कलश तैयार किया गया था। इसमें देश के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से लाया गया 1,100 लीटर पवित्र जल भरा गया। पानी भरने के बाद कलश का कुल वजन लगभग 1.86 मीट्रिक टन हो गया। कलश को शिखर तक पहुँचाने के लिए 350 टन क्षमता वाली ‘ऑल-टेरेन क्रेन’ का उपयोग किया गया, जिसके बूम को विशेष रूप से 90 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ाया गया था।

भव्य रोड शो

कार्यक्रम की शुरुआत पीएम मोदी के एक भव्य रोड शो से हुई, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने गर्भगृह में ‘विशेष महापूजा’ की और ध्वजारोहण कर राष्ट्र की समृद्धि की कामना की। इस ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में पीएम मोदी ने एक विशेष स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।

सरदार पटेल के संकल्प के 75 वर्ष

यह महोत्सव उस गौरवशाली क्षण को समर्पित है जब आजादी के बाद भारत के पहले उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रस्ताव पर मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था। यह समारोह 8 से 11 मई तक आयोजित किया गया है। चार दिवसीय इस उत्सव में देश भर के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी और लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस ‘अमृत पर्व’ के साक्षी बने।

कुंभाभिषेक का महत्व

आमतौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों में प्रचलित यह रस्म हर 10 से 12 साल में मंदिर के ‘शुद्धिकरण’ के लिए की जाती है। सोमनाथ मंदिर के इतिहास में यह पहली बार है जब शिखर का इस भव्यता के साथ अभिषेक किया गया है, जो उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया है।

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