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UP Assistant Teacher Recruitment: लखनऊ में तपती सड़क पर रेंगते हुए शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचे अभ्यर्थी

by Tarun Bhardwaj • May 18, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में कल यानी मंगलवार, 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली बेहद अहम 31वीं सुनवाई से ठीक पहले राजधानी लखनऊ की सड़कें आंदोलन की आग में तप उठीं। साल 2018 से पिछले आठ सालों से लगातार नियुक्ति पत्र के लिए संघर्ष कर रहे ओबीसी (OBC) और एससी (SC) वर्ग के पीड़ित अभ्यर्थियों ने सोमवार को भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच एक बेहद अनोखा और रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रदर्शन किया।

आक्रोशित अभ्यर्थी लखनऊ के गौतमपल्ली स्थित मॉल एवेन्यू इलाके में जमीन पर दंडवत करते हुए और कीड़े-मकौड़ों की तरह रेंगते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव करने पहुंचे। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस बेहद संवेदनशील मामले की बेहद ढीली पैरवी कर रही है, जिसके कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

तपती सड़क पर रेंगकर जताया विरोध

सोमवार दोपहर को लखनऊ में पारा अपने चरम पर था, लेकिन अपने हक की लड़ाई लड़ रहे शिक्षक अभ्यर्थियों का हौसला इस भीषण तपिश पर भी भारी पड़ा। सैकड़ों की संख्या में जुटे अभ्यर्थियों ने जब सड़क पर पेट के बल रेंगना शुरू किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने लंबे संघर्ष और इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच से न्याय मिलने के बावजूद सरकार उन्हें नियुक्तियां नहीं दे रही है। बार-बार तारीखें बदलने और कोर्ट के चक्कर काटने की वजह से अब वे मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं।

अभ्यर्थियों ने रुआंसे होकर कहा कि इस संवेदनहीन और बहरे सिस्टम की नजर में अब शिक्षित युवाओं की हैसियत महज रेंगने वाले कीड़े-मकौड़ों जैसी हो गई है, इसीलिए वे इस अनोखे अंदाज में मंत्री जी के द्वार पर न्याय की भीख मांगने आए हैं।

19 मई की 31वीं सुनवाई पर टिकी नजरें

लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 19 मई 2026 को इस केस की 31वीं तारीख नियत है। अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के मुख्य और वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट की पिछली अहम सुनवाइयों में समय पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं, जिसकी वजह से केस लगातार खिंचता जा रहा है।

उनकी प्रमुख मांग है कि सरकार कल होने वाली सुनवाई में अपने शीर्ष और वरिष्ठ वकीलों को विशेष रूप से दिल्ली भेजे, ताकि अदालत के सामने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार कोर्ट के माध्यम से जल्द से जल्द रास्ता साफ करवाए ताकि उन्हें लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उनका नियुक्ति पत्र मिल सके।

क्या है 69000 शिक्षक भर्ती विवाद?

यह पूरा विवाद साल 2018 से चला आ रहा है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पूरी चयन सूची (मेरिट लिस्ट) को रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को 3 महीने के भीतर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा रखी है। इससे पहले फरवरी 2026 में हुई पिछली सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बीच का रास्ता निकालने का बड़ा सुझाव दिया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या वर्तमान में कार्यरत और पुराने नियुक्त शिक्षकों को उनके पदों से हटाए बिना, आरक्षित वर्ग के प्रभावित 6,800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों को किसी अन्य रिक्त पदों पर समायोजित (एडजस्ट) किया जा सकता है?

अब कल यानी 19 मई 2026 को होने वाली इस महासुनवाई पर उत्तर प्रदेश के हजारों कार्यरत शिक्षकों और पिछले कई सालों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य पूरी तरह से टिका हुआ है। सोमवार को हुए इस उग्र और भावुक प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल तैनात है।

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