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UP: संभल हिंसा मामले में CJM कोर्ट ने सुनाया फैसला; एएसपी और इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर FIR का अदालती आदेश

by Tarun Bhardwaj • January 14, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले में अब पुलिस और न्यायपालिका के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और करीब 15 से 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का सख्त आदेश दिया है। यह मामला हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने और पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों से जुड़ा है। हालांकि, संभल के वर्तमान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कोर्ट के इस आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है, जिससे कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

क्या है पूरा विवाद

पीड़ित पक्ष के वकील कमर हुसैन के अनुसार, यह मामला ‘आलम’ नाम के एक युवक से जुड़ा है, जो रोजाना ‘पापे’ (रस्क) बेचने का काम करता था। आरोप है कि संभल हिंसा के दिन जब आलम अपनी ठेली लेकर वहां से गुजर रहा था, तभी पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में उसे गोली लग गई। घायल आलम ने इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन डर और हंगामे के माहौल में उसे कहीं समय पर उपचार नहीं मिला। पीड़ित के पिता ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का रुख

CJM कोर्ट ने मामले की गंभीरता और प्रारंभिक जांच के आधार पर सभी आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। दूसरी ओर, संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि वे इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेंगे। एसपी का तर्क है कि संभल हिंसा की पहले ही न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) हो चुकी है और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच पूरी की जा चुकी है, इसलिए फिलहाल एफआईआर दर्ज करने का सवाल ही नहीं उठता।

वकील की चेतावनी

पुलिस के इस कड़े रुख पर पीड़ित पक्ष के वकील ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता। यदि स्थानीय पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करती है, तो वे तुरंत हाई कोर्ट में ‘रिट याचिका’ दाखिल करेंगे ताकि कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा सके।

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