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US Iran Conflict: अमेरिकी मालवाहक जहाज पर हमले के बाद भड़का अमेरिका; ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर की भीषण एयरस्ट्राइक

by Tarun Bhardwaj • June 27, 2026
US carried out massive airstrikes on Iranian missile and drone sites

US Iran Conflict: अमेरिकी मालवाहक जहाज पर हमले के बाद भड़का अमेरिका; ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर की भीषण एयरस्ट्राइक

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यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में एक बार फिर युद्ध का तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में एक कमर्शियल (कारोबारी) जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद महाशक्ति अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बहुत बड़ा सैन्य एक्शन लिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए दावा किया है कि उसने ईरान के भीतर घुसकर उसके कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए हैं। अमेरिका की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

सिंगापुर के जहाज पर दागे थे 4 ड्रोन

अमेरिकी सेना (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई उस हमले के जवाब में की गई है जो 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ओमान तट के पास गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर किया गया था। इस व्यावसायिक जहाज पर एकतरफा हमलावर ड्रोन से हमला किया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते का ‘मूर्खतापूर्ण’ उल्लंघन करार दिया। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जहाज पर कुल चार ड्रोन दागे गए थे, जिनमें से एक ने जहाज के ऊपरी हिस्से को मामूली नुकसान पहुंचाया, लेकिन जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।

अमेरिकी सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए बाकी तीन ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा था, “उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था, अब आगे क्या होगा, यह आपको जल्द ही पता चल जाएगा।” और उसके चंद घंटों बाद ही अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान पर बमबारी कर दी।

ईरान के मिसाइल, ड्रोन और तटीय रडार साइट्स पूरी तरह तबाह

CENTCOM ने बताया कि 26 जून को की गई इस जवाबी सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने बेहद सटीक निशाना साधा। अमेरिकी हमलों में ईरान के उन खुफिया अड्डों को निशाना बनाया गया, जहां मिसाइल और घातक ड्रोन का भंडारण (स्टोरेज केंद्र) किया जाता था। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में नजर रखने वाले ईरान के कई तटीय रडार ठिकानों को भी इस हवाई हमले में पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया है। अमेरिका का कहना है कि व्यावसायिक जहाजों पर ईरानी बलों का यह हमला पूरी तरह से अनुचित था और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का खुला उल्लंघन था। ब्रिटेन की सेना ने भी ओमान तट के पास कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल हमले की पुष्टि की है।

ईरान का पहला तीखा रिएक्शन

अमेरिकी एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद ईरान की तरफ से बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के वरिष्ठ सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “अमेरिका ने एक बार फिर शांति वार्ता और सीजफायर की चर्चाओं के बीच ईरान पर पीठ पीछे हमला किया है। इस असफल अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने दुनिया को दिखा दिया है कि उसे बातचीत के सिद्धांतों या युद्धविराम के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है।” अजीजी ने आगे चेतावनी देते हुए लिखा कि युद्धविराम का यह लापरवाह उल्लंघन हमेशा की तरह अंत में अमेरिका के लिए पीछे हटने और बुरी तरह पछताने की वजह बनेगा। उन्होंने साफ कहा कि अब अमेरिका का कोई भी ‘ब्लेम गेम’ नहीं चलने वाला है।

वैश्विक व्यापार पर संकट

इस भीषण सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में हड़कंप मच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने फारस की खाड़ी में फंसे व्यावसायिक जहाजों की निकासी को अस्थायी रूप से तुरंत रोक दिया है। संगठन का कहना है कि जब तक क्षेत्र में अन्य जहाजों की सुरक्षा की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक रूट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

आईएमओ के महासचिव अर्सेनियो डोमिंगुएज के अनुसार, हाल के दिनों में लगभग 115 जहाज इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल चुके हैं, लेकिन ताजा हमले और अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद करीब 500 मालवाहक जहाज अब भी उसी संवेदनशील क्षेत्र में फंसे हुए हैं। यदि यह तनाव लंबा खिंचा, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई और वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। फिलहाल अमेरिकी सेना क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क और हाई-अलर्ट पर तैनात है।

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