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West Asia Crisis: आरबीआई गवर्नर का स्पष्ट संकेत, पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचा तो जनता पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

by Tarun Bhardwaj • May 13, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी साझा की है। ज्यूरिख में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और स्विस नेशनल बैंक के उच्च-स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गवर्नर ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जो उछाल आया है, उसका प्रभाव जल्द ही घरेलू बाजार पर दिख सकता है।

उन्होंने बताया कि अब तक सरकार ने ड्यूटी में कटौती और अन्य वित्तीय उपायों के जरिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखकर इस भारी बोझ को खुद वहन किया है, लेकिन अनिश्चित काल तक इस स्थिति को बनाए रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा। यदि यह वैश्विक व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो सरकार के पास बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा, जिससे आने वाले समय में आम जनता को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की पश्चिम एशिया पर गहरी निर्भरता को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत के कुल आयात-निर्यात का छठा हिस्सा इसी क्षेत्र से संचालित होता है। इसके अलावा देश को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का चालीस प्रतिशत, उर्वरक आयात का चालीस प्रतिशत और गैस आपूर्ति का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है, जो मध्य पूर्व में किसी भी अस्थिरता को भारत की आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा जोखिम बनाता है।

हालांकि उन्होंने सरकार के राजकोषीय विवेक की सराहना करते हुए कहा कि महामारी के दौरान बढ़े हुए राजकोषीय घाटे को प्रभावी ढंग से कम कर लिया गया है, लेकिन आपूर्ति पक्ष से मिलने वाले झटके घरेलू महंगाई के लिए अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विशेषकर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बास्केट में खाद्य पदार्थों की उच्च हिस्सेदारी के कारण आपूर्ति में होने वाले किसी भी व्यवधान का असर व्यापक महंगाई के रूप में फैल सकता है।

महंगाई के बढ़ते जोखिमों पर चर्चा करते हुए आरबीआई गवर्नर ने यह स्वीकार किया कि आपूर्ति श्रृंखला के बड़े झटकों से निपटने के लिए केवल मौद्रिक नीति पर्याप्त साबित नहीं हो सकती है, जिसके लिए नीति निर्माताओं को अधिक सतर्क और सक्रिय रवैया अपनाना होगा।

उन्होंने जोर दिया कि यदि वैश्विक संकट के कारण महंगाई अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैलने लगती है, तो नीतिगत स्तर पर अनिवार्य हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी। गवर्नर का यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि सरकार ने अब तक जनता को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा है, किंतु अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की जटिलता और पश्चिम एशिया की अनिश्चितता को देखते हुए भविष्य में घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में वृद्धि एक अपरिहार्य कदम बन सकता है।

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