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West Bengal: चुनाव के बाद हिंसा का तांडव जारी; संदेशखाली में पेट्रोलिंग टीम पर अंधाधुंध फायरिंग, 5 जवान जख्मी

by Tarun Bhardwaj • May 6, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में देर रात सुरक्षाबलों पर हुए हमले ने राज्य में चुनाव के बाद की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाजत थाना क्षेत्र में गश्त कर रही पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम पर उपद्रवियों ने अचानक हमला बोल दिया, जिसमें 5 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं।

सरबेरिया में आधी रात को हमला

राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्तर 24 परगना के सरबेरिया-आगरहाटी ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब बामनघेरी इलाके में पुलिस टीम पहुंची। पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम जैसे ही वार्ड नंबर 14 में गश्त के लिए दाखिल हुई, वहां घात लगाकर बैठे उपद्रवियों ने उन पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में देसी बम, अवैध हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है।

हिंसा की आग में झुलस रहा बंगाल

संदेशखाली की घटना कोई अकेली वारदात नहीं है; राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगातार मौत और तोड़फोड़ की खबरें आ रही हैं। टाउन में टीएमसी कार्यकर्ताओं की कथित पिटाई से बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई, जबकि बीरभूम के नानूर में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की हत्या का मामला सामने आया है। जगतबल्लवपुर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में आग लगा दी गई, वहीं न्यू मार्केट इलाके में दुकानों और पार्टी दफ्तरों को निशाना बनाने की खबरें हैं।

चुनाव आयोग ने हालात पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी को कड़े निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल पूरे संदेशखाली और प्रभावित क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और केंद्रीय टुकड़ियों की तैनाती की गई है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद व्याप्त स्थिति को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा ‘पोरिबोर्तन’ (बदलाव) के नाम पर डर का माहौल बना रही है, जिसे वे जीत का जश्न नहीं बल्कि खुला आतंक मानते हैं।

टीएमसी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इनके चलते कार्यकर्ताओं को कानून हाथ में लेने की खुली छूट मिल गई है। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि हिंसा के दौरान ये बल मूकदर्शक बने रहे और उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। टीएमसी ने इस ‘आतंक’ के खिलाफ डटकर मुकाबला करने की घोषणा की है और स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह के दबाव में नहीं झुकेंगे।

प्रशासनिक सतर्कता

पश्चिम बंगाल में हिंसा की हालिया घटनाओं को देखते हुए प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं और हिंसा में शामिल संदिग्धों की पहचान के लिए सघन तलाशी अभियान और छापेमारी की जा रही है। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष ने गहरा डर जताया है कि यह बढ़ता राजनीतिक तनाव भविष्य में और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जिससे आम नागरिकों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है।

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