Fri, Jun 5th, 2026
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World: बलूचिस्तान का विदेश मंत्री जयशंकर को ऐतिहासिक पत्र, लिखा- पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ

by Tarun Bhardwaj • January 2, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। बलूचिस्तान की आजादी की आवाज बुलंद करने वाले निर्वासित नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक बेहद महत्वपूर्ण और साहसी ‘ओपन लेटर’ लिखा है। नए साल 2026 के अवसर पर लिखे गए इस पत्र में उन्होंने 6 करोड़ बलोच नागरिकों की ओर से 140 करोड़ भारतीयों को शुभकामनाएं देते हुए पाकिस्तान के चंगुल से मुक्ति पाने के लिए भारत से सक्रिय सहयोग की अपील की है। मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को इस साझा संघर्ष का आधार बताया है।

साझा विरासत और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पावन स्थल हमारी साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने मोदी सरकार के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा कि जिस साहस के साथ भारत अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहा है, वह बलूचिस्तान के लिए प्रेरणा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि अब समय आ गया है जब पाकिस्तान के कब्जे और उसके द्वारा पोषित आतंकवाद को जड़ से खत्म कर दिया जाए।

ड्रैगन की मौजूदगी पर बड़ी चेतावनी

पत्र का सबसे संवेदनशील हिस्सा चीन की दखलअंदाजी से जुड़ा है। मीर यार बलोच ने चेतावनी दी है कि यदि बलूचिस्तान की सेना की क्षमताओं को जल्द मजबूत नहीं किया गया, तो अगले कुछ महीनों में चीन वहां अपनी सेना की तैनाती कर सकता है। बलूच लोगों की इच्छा के विरुद्ध चीनी सेना की मौजूदगी न केवल बलूचिस्तान के लिए, बल्कि भारत की सुरक्षा और भविष्य के लिए भी एक ‘अकल्पनीय खतरा’ पैदा करेगी।

कौन हैं मीर यार बलोच

मीर यार बलोच एक प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और ‘फ्री बलूचिस्तान आंदोलन’ के प्रमुख स्तंभ हैं। उनका प्रभाव इस बात से समझा जा सकता है कि 14 मई 2025 को उन्होंने औपचारिक रूप से पाकिस्तान से “बलूचिस्तान गणराज्य” की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) से बलूचिस्तान को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता देने और वहां शांति सेना तैनात करने का आग्रह किया है। साल 2026 से उनकी योजना दुनिया के 190 देशों में अपने राजनयिक मिशन (Ambassies) खोलने की है, ताकि पाकिस्तान के नरसंहार के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाया जा सके।

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