यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी तीखी बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आव्रजन (Immigration) जगत में भूचाल ला दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किए गए एक विवादास्पद पत्र में ट्रंप ने भारत और चीन जैसे देशों को 'नर्क' (Hellholes) कहकर संबोधित किया है। ट्रंप का यह हमला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 'बर्थराइट सिटीजनशिप' (जन्मसिद्ध नागरिकता) को लेकर कानूनी और राजनीतिक खींचतान चरम पर है। 'नर्क' वाली टिप्पणी ट्रंप ने अपने पत्र में जन्मजात नागरिकता नीति की कड़ी आलोचना करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने लिखा, "यहां पैदा हुआ बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे चीन, भारत या ग्रह के किसी अन्य 'नर्क' (Hellhole) से अपने पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।" उन्होंने 'चेन माइग्रेशन' को अमेरिका की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के लिए एक बड़ा खतरा बताया और दावा किया कि प्रवासी सार्वजनिक सुविधाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिसका बोझ अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर पड़ रहा है। टेक नौकरियों पर भारत-चीन का 'वर्चस्व' ट्रंप ने कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली और टेक सेक्टर को लेकर भी बड़ा दावा किया। राष्ट्रपति के अनुसार, टेक सेक्टर की नौकरियों पर भारत और चीन के लोगों का वर्चस्व है, जिससे मूल अमेरिकियों के लिए अवसर सीमित हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने इस दावे के पक्ष में कोई सांख्यिकीय डेटा या पुख्ता सबूत पेश नहीं किए। गौर करने वाली बात है कि ट्रंप प्रशासन पहले ही H-1B वीजा में 25% की कटौती कर चुका है, जिससे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स में पहले ही भारी चिंता बनी हुई है। कानून और संस्थाओं पर उठाए सवाल ट्रंप ने इस मुद्दे को अदालतों के बजाय जनता के बीच ले जाने की वकालत की है। उन्होंने तर्क दिया कि जन्मजात नागरिकता का फैसला वकीलों को नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मतदान (National Voting) के जरिए होना चाहिए। ट्रंप ने 'अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन' (ACLU) पर निशाना साधते हुए उन्हें 'आपराधिक संस्था' करार दिया और उन पर RICO कानूनों (संगठित अपराध विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई करने का सुझाव दिया। कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ सकता है असर भारत जैसे रणनीतिक साझेदार और क्वाड (QUAD) सहयोगी देश के खिलाफ 'नर्क' जैसे शब्दों का इस्तेमाल भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान पूरी तरह से घरेलू वोट बैंक और अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को धार देने के लिए है, लेकिन वैश्विक मंच पर इससे अमेरिका की छवि और उसके सहयोगियों के साथ भरोसे पर आंच आ सकती है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Bengal Chunav: हुमायूँ कबीर के काफिले पर पथराव, सुवेंदु सरकार को सरेआम पीटा; बंपर वोटिंग के बीच मचा बवाल [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]