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अनिल अंबानी की बढ़ीं मुश्किलें, ED ने फर्जी बैंक गारंटी मामले में जांच की शुरू

by Tarun Bhardwaj • August 1, 2025
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यूनिक समय, नई दिल्ली। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं। कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले के बाद, अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹68 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी मामले में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

ईडी ने इस मामले में शुक्रवार को ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक नामक कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े तीन ठिकानों पर छापेमारी की। इसके अलावा, कोलकाता में एक सहयोगी के ठिकाने पर भी छापेमारी की गई और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों व डिजिटल सबूतों को ज़ब्त किया गया है।

यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले के तहत की गई है, जिसमें बिस्वाल ट्रेडलिंक पर विभिन्न व्यावसायिक समूहों के लिए नकली बैंक गारंटी जारी करने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट के ज़रिए अनिल अंबानी समूह की एक कंपनी को भी कथित तौर पर ₹68 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी उपलब्ध कराई गई थी।

ईडी की जांच का दायरा

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रिलायंस समूह की कंपनियाँ इस धोखाधड़ी में कितनी संलिप्त थीं और क्या सरकारी एजेंसियों को जानबूझकर गुमराह किया गया था।

ईडी का आरोप है कि अनिल अंबानी की एक कंपनी को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर ठेका दिया गया था। यह गारंटी ओडिशा की बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी की गई थी। एजेंसी की जाँच में सामने आया है कि यह फर्म 8% कमीशन पर फर्जी बैंक गारंटी जारी कर रही थी।

ईडी का दावा है कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने इस फर्जी गारंटी के बदले कमीशन भुगतान दिखाने के लिए फर्जी बिल तैयार किए। जाँच के दौरान कई अघोषित बैंक खातों का भी पता चला है, जिनमें करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए हैं।

फर्जी गारंटी का विवरण

एजेंसी ने बताया कि रिलायंस समूह की दो कंपनियों – रिलायंस एनयू बेस लिमिटेड और महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड – के नाम पर ₹68.2 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी जारी की गई थी। यह गारंटी भारत सरकार के सौर ऊर्जा निगम (SECI) को सौंपी गई थी।

फर्जी गारंटी को असली साबित करने की कोशिश में, रिलायंस ग्रुप ने कथित तौर पर SECI को संपर्क करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के असली डोमेन sbi.co.in के बजाय एक फर्जी डोमेन s-bi.co.in का इस्तेमाल किया। ईडी ने इस नकली डोमेन के पंजीकरण से जुड़ी जानकारी के लिए नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) से विवरण माँगा है।

बिस्वाल ट्रेडलिंक: एक कागजी कंपनी

ईडी की जाँच में यह भी सामने आया कि बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड एक कागजी कंपनी है। इसका पंजीकृत पता एक रिश्तेदार के आवासीय घर का है, जहाँ कंपनी से जुड़ा कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं मिला।

इसके अलावा, संबंधित लोगों द्वारा टेलीग्राम ऐप के “डिसअपीयरिंग मैसेज” फीचर का इस्तेमाल किया गया, ताकि चैट को सुरक्षित रूप से हटाया जा सके। एजेंसी का मानना है कि यह जानबूझकर बातचीत छिपाने का प्रयास है।

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