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सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की ‘धड़क 2’ आज सिनेमाघरों में देगी दस्तक

by Tarun Bhardwaj • August 1, 2025
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यूनिक समय, नई दिल्ली। सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी अभिनीत फिल्म ‘धड़क 2’ आज से सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म मुख्य रूप से जातिवाद के संवेदनशील मुद्दे को उजागर करती है, जिसमें ऊंची और नीची जाति के बीच के भेदभाव और सामाजिक दूरियों को दर्शाया गया है। कहानी में रोमांस को भी पिरोने की कोशिश की गई है।

फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता थी, खासकर इसके ट्रेलर को देखने के बाद जो एक रोमांटिक-कॉमेडी का आभास दे रहा था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह फिल्म वास्तव में दर्शकों के दिलों पर राज कर पाई है और क्या यह वह रोमांटिक-कॉमेडी वाला स्पर्श दे पाई है जिसकी उम्मीद की जा रही थी? आइए जानते हैं कि ‘धड़क 2’ देखने लायक है या नहीं।

कहानी और मुख्य विषय

फिल्म की कहानी ऊंची और नीची जातियों के बीच सामाजिक दूरी और भेदभाव पर केंद्रित है। यह दर्शाती है कि कैसे दोनों तबकों को अलग-अलग स्तर की आज़ादी मिलती है और उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कहानी की शुरुआत दिलचस्प ढंग से होती है, जहाँ तृप्ति डिमरी एक फंक्शन में डांस करती दिखती हैं और सिद्धांत चतुर्वेदी बैंड बजाते हुए नज़र आते हैं। इसके बाद कॉलेज लाइफ शुरू होती है, जहाँ दोनों दोस्त बनते हैं, पढ़ाई में एक-दूसरे की मदद करते हैं और धीरे-धीरे उनकी प्रेम कहानी परवान चढ़ती है।

लेकिन उनकी अलग-अलग जाति के कारण, यह प्रेम कहानी कई बड़ी बाधाओं का सामना करती है। सामाजिक भेदभाव, परिवार की बंदिशें और सिस्टम की कठोरता उन्हें एक नहीं होने देती। फिल्म का सस्पेंस इसी बात में निहित है कि क्या ये दोनों अंत में एक हो पाएंगे और क्या जाति के बीच का अंतर मिट पाएगा। कहानी का अंत एक सकारात्मक संदेश के साथ होता है, जो दर्शकों के दिल को छू सकता है।

अभिनय प्रदर्शन

फिल्म में सभी कलाकारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, चाहे वे लीड रोल में हों या सपोर्टिंग कास्ट में। सिद्धांत चतुर्वेदी ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशंस और डायलॉग डिलीवरी सराहनीय है। तृप्ति डिमरी ने भी अपनी भूमिका में जान डाल दी है। वह अपने भावनात्मक दृश्यों, डांस और रोमांटिक पलों में दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रही हैं। सहायक कलाकारों ने भी फिल्म की कहानी को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

निर्देशन और पटकथा

हालांकि, निर्देशन और स्टोरीलाइन के मामले में फिल्म थोड़ी कमजोर साबित होती है। कई जगहों पर पटकथा भ्रमित करती है और कुछ दृश्य बेवजह खींचे हुए लगते हैं। फिल्म को जिस तरह से ट्रेलर में एक रोमांटिक कहानी के रूप में प्रचारित किया गया था, वैसा कंटेंट दर्शकों को स्क्रीन पर देखने को नहीं मिलता। यही वजह है कि दर्शकों की जो उम्मीदें थीं, वे कहीं न कहीं अधूरी रह जाती हैं।

कुल मिलाकर, ‘धड़क 2’ एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे को उठाती है, और कलाकारों का अभिनय सराहनीय है। हालांकि, ढीली पटकथा और भ्रामक प्रचार के कारण यह कुछ दर्शकों को निराश कर सकती है। यदि आप जातिवाद के मुद्दे पर बनी एक गंभीर फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए हो सकती है, लेकिन यदि आप एक हल्की-फुल्की रोमांटिक-कॉमेडी की तलाश में हैं, तो शायद यह आपकी अपेक्षाओं पर खरी न उतरे।

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