Rafale Deal: आसमान में फिर गूंजेगी राफेल की दहाड़; मोदी सरकार ने नए लड़ाकू विमानों की खरीद को दी मंजूरी

Modi government approves purchase of new fighter jets

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में फ्रांस से नए राफेल लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त खरीद को हरी झंडी दे दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में 114 मल्टीरोल राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी गई है, जिसकी कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल के उस खौफ को देख चुकी है, जिसने पाकिस्तान के ‘नूर खान’ जैसे प्रमुख एयरबेस की सुरक्षा को पलक झपकते ही ध्वस्त कर दिया था।

हवा से हवा और जमीन पर अचूक प्रहार

राफेल मात्र एक युद्धक विमान नहीं है बल्कि इसे आसमान में उड़ता हुआ एक शक्तिशाली ‘हथियार स्टेशन’ माना जाता है जिसकी उन्नत मारक प्रणाली इसे दुनिया के किसी भी अन्य फाइटर जेट से कहीं अधिक घातक और विशिष्ट बनाती है।

इस विमान में लगी Meteor मिसाइल हवा से हवा में प्रहार करने वाली विश्व की सबसे आधुनिक मिसाइलों में से एक है जो 100 किलोमीटर से अधिक की विशाल रेंज के कारण दुश्मन के विमान को उसकी नजर में आने से पहले ही हवा में ध्वस्त करने की क्षमता रखती है।

इसके अतिरिक्त राफेल में लगी SCALP क्रूज मिसाइल 300 से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शत्रु के सुरक्षित बंकरों और ठिकानों को अचूक सटीकता से तबाह कर सकती है जबकि इसकी हैमर (HAMMER) मिसाइल को विशेष रूप से दुश्मन के सबसे मजबूत कंक्रीट ढांचों को मिट्टी में मिलाने के लिए डिजाइन किया गया है।

RBE2 रडार और SPECTRA

राफेल की सबसे बड़ी तकनीकी ताकत इसका RBE2 AESA रडार है जो एक साथ 40 लक्ष्यों को ट्रैक करने की असाधारण क्षमता रखता है और इसके साथ लगा SPECTRA सिस्टम एक अभेद्य सुरक्षा ढाल की तरह काम करता है जो दुश्मन के रडार सिग्नल्स को जैम करके विमान को उनकी नजरों से ओझल कर देता है।

युद्ध की स्थिति में पायलट की सहायता के लिए इसमें हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले की सुविधा दी गई है जिससे सारा महत्वपूर्ण डेटा सीधे हेलमेट के शीशे पर ही दिखाई देता है और पायलट को बार-बार डैशबोर्ड देखने की जरूरत नहीं पड़ती जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है।

वायुसेना के साथ-साथ भारतीय नौसेना की शक्ति बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं जिसके तहत अप्रैल 2025 में हुए 63 हजार करोड़ रुपये के समझौते के माध्यम से 26 राफेल-मरीन (Rafale-M) विमान जल्द ही भारतीय बेड़े का हिस्सा बनेंगे।

ये विशिष्ट जेट समुद्र के बीच से INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विशाल विमानवाहक पोतों से उड़ान भरने के लिए ही तैयार किए गए हैं और इस व्यापक डील में आधुनिक हथियारों के साथ-साथ उच्च स्तरीय सिमुलेटर और लंबी अवधि की तकनीकी सहायता भी शामिल की गई है।

भविष्य की रणनीति

36 राफेल विमानों की पहली खेप अंबाला के ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा के ‘फाल्कन्स’ स्क्वाड्रन में पहले से ही अपनी सेवाएं दे रही है। नई खरीद से न केवल वायुसेना की ‘स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ’ बढ़ेगी, बल्कि यह चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है।

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