
यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने मंगलवार शाम 4 बजे देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ ही नोबेल विजेता मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
बंपर जीत के साथ सत्ता में वापसी
12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी (BNP) ने एकतरफा जीत हासिल की है। कुल 297 सीटों में से 209 सीटें जीतकर बीएनपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। वहीं, जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। गौर करने वाली बात यह है कि इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी।
तारिक रहमान के नए मंत्रिमंडल में अनुभवी राजनेताओं के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों को स्थान दिया गया है, जो उनकी सरकार की एक समावेशी छवि को दर्शाता है। इस नई कैबिनेट के तहत डॉ. खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री, सलाहुद्दीन अहमद को गृहमंत्री और डॉ. अमीर खसरू महमूद चौधरी को वित्त एवं प्लानिंग मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार ने विविधता पर जोर देते हुए निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान जैसे अल्पसंख्यक नेताओं को भी कैबिनेट में शामिल किया है, जिससे देश के सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व देने और एक मजबूत लोकतांत्रिक संदेश साझा करने की कोशिश की गई है।
वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी
शपथ ग्रहण समारोह में दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो नई सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने का संकेत है। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री विशेष रूप से इस ऐतिहासिक अवसर का गवाह बनने पहुंचे, जहाँ बांग्लादेशी प्रशासन द्वारा उनका अत्यंत गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। इस वैश्विक जमावड़े में मलेशिया के प्रधानमंत्री सहित पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि भी मंच पर मौजूद रहे, जो क्षेत्रीय सहयोग की नई दिशा को दर्शाता है। साथ ही, बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति के विस्तार का परिचय देते हुए चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई जैसे प्रभावशाली देशों को भी इस समारोह के लिए विशेष निमंत्रण भेजा था।
छात्र आंदोलन और राजनीतिक हिंसा के कारण शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से बांग्लादेश प्रशासनिक अनिश्चितता से जूझ रहा था। तारिक रहमान ने शपथ ग्रहण से पहले जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर देश में शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का संकल्प दोहराया।
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