
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुधवार से शुरू हो रही इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा रक्षा क्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण इजरायल द्वारा भारत को अपने अचूक ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीक ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है। चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते सीमा तनाव के बीच, यह तकनीक भारत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।
आयरन डोम
हमास, हिज़्बुल्ला और ईरान के खिलाफ युद्ध में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर चुका इजरायल का प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस सिस्टम अब भारतीय आसमान की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढाल बन सकता है। यह अत्याधुनिक सिस्टम रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों को 90% की शानदार सफलता दर के साथ हवा में ही पहचान कर उन्हें नष्ट करने की अद्वितीय क्षमता रखता है।
रक्षा सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए इजरायल न केवल इस रक्षा प्रणाली को बेचने का प्रस्ताव दे रहा है, बल्कि वह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इसकी महत्वपूर्ण तकनीक को साझा करने और भारत में ही सैन्य उपकरणों के निर्माण का भी इच्छुक है। वर्तमान सामरिक परिवेश में रॉकेट और मोर्टार हमलों के विरुद्ध इसे दुनिया का सबसे प्रभावी मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है, जो भारत की सीमावर्ती सुरक्षा को एक नया और अभेद्य आयाम प्रदान कर सकता है।
नया वैश्विक गठबंधन
भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच के अनुसार, पीएम मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय समझौतों तक सीमित नहीं है। इजरायल भारत, अब्राहम अकॉर्ड्स के देशों, मध्य पूर्व (साइप्रस, ग्रीस) और कुछ अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर एक नया सहयोग समूह बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य कट्टरपंथी ताकतों और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटना है।
रक्षा के साथ कूटनीतिक जीत
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का पुरजोर समर्थन करता है। पीएम मोदी के दौरे के लिए तैयार कैबिनेट प्रस्ताव में रक्षा के साथ-साथ आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी विशेष रोडमैप तैयार किया गया है।
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