
यूनिक समय, नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच राजनीति के गलियारों से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लोकसभा में पिछले कई दिनों से जारी निलंबन का ड्रामा आखिरकार समाप्त हो गया है। सदन ने सर्वसम्मति से विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया है, जिन्हें बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
कैसे बनी बात?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ की गई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद सदन में जारी गतिरोध समाप्त हो गया, जिसका मुख्य उद्देश्य संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करना था। इस बैठक के सकारात्मक परिणाम के रूप में, कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने सदन में विपक्षी सांसदों के पिछले आचरण पर औपचारिक रूप से खेद प्रकट करते हुए उनका निलंबन वापस लेने का अनुरोध किया। विपक्षी दल की इस पहल के तुरंत बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सदन में निलंबन खत्म करने का आधिकारिक प्रस्ताव पेश किया, जिसे लोकसभा ने बिना किसी विरोध के ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी।
इन सांसदों की हुई सदन में वापसी
निलंबन रद्द होने वाले सांसदों में 7 कांग्रेस से और 1 माकपा (CPIM) से हैं। ये सभी सांसद निलंबन के बाद से संसद के मकर द्वार पर लगातार धरना दे रहे थे।
| सांसद का नाम | पार्टी |
| मणिकम टैगोर | कांग्रेस |
| अमरिंदर सिंह राजा वडिंग | कांग्रेस |
| गुरजीत सिंह औजला | कांग्रेस |
| हिबी ईडन | कांग्रेस |
| डीन कुरियाकोस | कांग्रेस |
| प्रशांत पडोले | कांग्रेस |
| किरण कुमार रेड्डी | कांग्रेस |
| एस. वेंकटेशन | माकपा |
क्या था पूरा मामला?
इन सांसदों पर 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान कड़ा एक्शन लिया गया था। आरोप था कि चर्चा के दौरान इन सदस्यों ने वेल में आकर आसन (Chair) की ओर कागज फेंके थे। सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने और अवमानना करने के इस मामले में इन्हें पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। अब निलंबन रद्द होने के बाद ये सभी सांसद दोबारा विधायी कार्यों में हिस्सा ले सकेंगे।
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