यूनिक समय, मथुरा। बुधवार को जनपद मथुरा में जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कैंट बिजली घर पर भाजपा सरकार की नीतियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार जनहित की अनदेखी कर विद्युत विभाग को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है, जिससे भविष्य में आम जनता और किसानों पर आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। इस दौरान कांग्रेस ने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन विद्युत मुख्य अभियंता को सौंपकर अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदम विनाशकारी साबित होंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि निजीकरण से न केवल हजारों बिजली कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक जाएगी, बल्कि किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और राहत भी खत्म हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बिजली व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ट्यूबवेलों को पर्याप्त बिजली न मिलने से फसलें सूख रही हैं, जो अन्नदाताओं के साथ सरासर अन्याय है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार के उस वादे की भी याद दिलाई जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात कही गई थी, जबकि हकीकत में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम बिल थोपे जा रहे हैं। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उपभोक्ताओं को अब स्पष्ट और विस्तृत बिल नहीं दिए जा रहे, बल्कि केवल मोबाइल संदेश के जरिए बिल की राशि भेज दी जाती है, जिसमें पारदर्शिता का अभाव है। इतना ही नहीं, बिना किसी पूर्व सूचना के कनेक्शन काटने और उपभोक्ताओं पर भारी जुर्माना लगाने की प्रवृत्ति को कांग्रेस ने तानाशाही करार दिया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए, उपभोक्ताओं को घर पर भौतिक बिल उपलब्ध कराए जाएं और ट्यूबवेलों को नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस प्रदर्शन में ललिता देवी, रूपा लवानिया, अर्पित जादौन और गौरी शंकर यादव सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया और जनता को राहत प्रदान नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे चुप नहीं बैठेंगे और सड़क से लेकर सदन तक जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: India News: ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा फैसला; अब PNG वाले क्षेत्रों में बंद होगी LPG सप्लाई [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]