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Mathura News: एफसीआई ठेकेदारों की मनमानी और हठधर्मिता के चलते हजारों गरीबों का राशन अटका

by Tarun Bhardwaj • April 2, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण में भारी अव्यवस्था का मामला गरमा गया है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के परिवहन ठेकेदारों की कथित लापरवाही और मनमानी के चलते मार्च माह का सरकारी राशन समय पर उचित दर की दुकानों तक नहीं पहुंच सका। इस प्रशासनिक विफलता के कारण जनपद के हजारों गरीब कार्ड धारक अपने हक के खाद्यान्न से वंचित रह गए हैं, जिससे पूरी तहसील और ब्लॉकों में भारी जन-आक्रोश व्याप्त है।

समय पर नहीं पहुँचा ‘बाजरा’

मथुरा में शासन द्वारा मार्च माह के राशन वितरण के लिए 12 मार्च की तिथि निर्धारित की गई थी, जिसके तहत ठेकेदारों को 11 मार्च तक गेहूं, चावल और बाजरा उचित दर की दुकानों तक पहुंचाना अनिवार्य था; परंतु ठेकेदारों की घोर लापरवाही के चलते मुख्य खाद्यान्न ‘बाजरा’ की आपूर्ति 29 मार्च तक खिंच गई। इस देरी के परिणामस्वरूप महीने के अंत में मात्र 2 दिन ही वितरण संभव हो सका, जिससे बड़ी संख्या में गरीब लाभार्थी पोर्टल बंद होने के कारण अपना निर्धारित कोटा लेने से वंचित रह गए और पूरे जनपद में भारी असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

राशन की दुकानों पर हंगामा और विवाद

राशन न मिलने से नाराज कार्ड धारकों की भीड़ अब उचित दर की दुकानों पर उमड़ रही है। कई क्षेत्रों से कोटेदारों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और विवाद की खबरें आ रही हैं। लाभार्थियों का कहना है कि होली जैसे त्योहार के सीजन में भी उन्हें समय पर अनाज नहीं मिल सका, जो प्रशासन की संवेदनशीलता पर बड़ा सवालिया निशान है।

BJYM की सरकार से बड़ी मांग

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला महामंत्री यतेंद्र फौजदार ने राशन वितरण में हुई इस भारी लापरवाही के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी सी.पी. सिंह से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि ठेकेदारों की हठधर्मिता के कारण न केवल गरीबों का हक मारा गया है, बल्कि यह सरकार की पारदर्शी छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है; अतः उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का पुरजोर आग्रह किया है ताकि भविष्य में ऐसी प्रशासनिक विफलता की पुनरावृत्ति न हो।

जनपद में राशन की इस किल्लत ने आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि ठेकेदारों ने 11 मार्च की समय सीमा का उल्लंघन किया था, तो विभाग ने उन पर पहले ही शिकंजा क्यों नहीं कसा? अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी इस मामले में दोषी परिवहन फर्मों के खिलाफ क्या कड़ा कदम उठाते हैं और वंचित लाभार्थियों को उनके मार्च माह के राशन की भरपाई कैसे सुनिश्चित की जाती है।

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