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मोदी ने मन की बात में कहा— सत्ता में रहना मकसद नहीं, सेवा में रहना चाहता हूं, युवाओं को दिए तीन मंत्र

by Raju Chaurasia • November 28, 2021
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नई दिल्ली। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मन की बात के 83वें संस्कार में देश के सामने अपनी बात की। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव, आदिवासियों, आयुष्मान भारत और स्टार्टअप्स पर बात की।

इस दौरान आयुष्मान भारत के एक लाभार्थी ने मोदी से कहा कि हम चाहते हैं कि आप हमेशा सत्ता में रहें। इस पर मोदी ने कहा- मेरा मकसद सत्ता में रहना नहीं, बल्कि सेवा में रहना है। मोदी ने इस दौरान लोगों को आगाह किया कि कोरोना अभी गया नहीं है। इसलिए सावधानी बरतें। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने लोगों को याद दिलाया कि 6 दिसंबर को बाबा साहेब अंबेडकर की पुण्य तिथि है। आइए हम इस दिन संकल्प लें कि अमृत महोत्सव में अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाएंगे। उन्होंने युवाओं को तीन मंत्र भी दिए।

मन की बात की शुरुआत मोदी ने वीरों के स्मरण के साथ की। उन्होंने बताया कि किस तरह से देश में लोग अलग-अलग तरह से आजादी के वीरों की गौरव गाथा को याद कर रहे हैं। उन्होंने हिमाचल के रामकुमार जोशी का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने छोटे से पोस्टल स्टैंप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाल बहादुर शास्त्री के अनोखे स्केच बनाए और इसमें उनसे जुड़े किस्से भी लिखे।

मध्यप्रदेश के कटनी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कुछ साथियों ने रानी दुर्गावती के साहस और बलिदान की यादों को ताजा करते हुए एक आयोजन किया है। ऐसा ही एक कार्यक्रम काशी में हुआ। इस दौरान मोदी ने आजादी के आंदोलन से जुड़ी रंगोली बनाना, बच्चों के मन में भव्य भारत के सपने जगाने वाली लोरी लिखने और अन्य प्रतियोगिताओं में बच्चों से भाग लेने की अपील की।

वृंदावन का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में शहर पर्थ है। यहां अक्सर क्रिकेट मैच होते रहते हैं। यहां सेक्रेट इंडिया आर्ट गैलरी है। यह ऑस्ट्रेलिया की एक महिला की वजह से हुआ है। वे 13 साल से अधिक समय वृंदावन में रहीं। कहती हैं कि वृंदावन को कभी भूल नहीं पाईं, इसलिए ऑस्ट्रेलया में ही वृंदावन खड़ा कर दिया। यहां भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कई कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं।

मोदी ने जालौन की पारंपरिक नून को जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों और तमिलनाडु के तूतूकुड़ी इलाके के लोगों को प्राकृतिक आपदा का बचाव खोजने के लिए बधाई दी। मोदी ने मेघालय में एक फ्लाइंग बोट की तस्वीर का भी जिक्र किया, जिसमें नदी के साफ पानी में तलहटी दिख रही है।

आयुष्मान के लाभार्थियों से बात : मोदी ने आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले राजेश कुमार प्रजापति से बात की। वे हार्ट की समस्या से ग्रसित थे। राजेश ने बताया कि सीने में जलन थी। प्राइवेट नौकरी करने वाले राजेश ने आयुष्मान कार्ड से इलाज करवाया। एक पैसा खर्च नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप अब गरीबों को आयुष्मान योजना के संबंध में समझाएं। मुझे बहुत खुशी होगी।

मथुरा की 40 वर्षीय सुखदेवी ने बताया कि उनके दोनों घुटने 16 साल से खराब थे। सुखदेवी ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज करवाया। एक भी पैसा नहीं लगा।

युवाओं को तीन मंत्र : मोदी ने स्टार्टअप्स के बढ़ते दायरे के लिए युवाओं को बधाई दी। कहा- युवाओं से समृद्ध हर देश के लिए तीन चीजें बहुत मायने रखती हैं। पहली आयडियान और इनोवेशन, दूसरी जोखिम लेने का जज्बा और तीसरी Can Do Spirit किसी भी काम को करने की जिद। ये तीनों मिले तो चमत्कार हो जाते हैं।

उन्होंने कहा – यूनिकॉर्न शब्द खूब चर्चा में है। इसका मतलब है कि कम से कम एक बिलियन डॉलर यानी 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की कंपनी। 2015 में देश में बमुश्किल 9 या 10 यूनिकॉर्न थे। अब इसकी दुनिया में भारत तेज उड़ान भर रहा है। 10 महीनों में भारत में हर 10 दिन में एक यूनिकॉर्न बने हैं। युवाओं ने ये सफलता कोरोना के बीच हासिल की। आज भारत में 70 से ज्यादा स्टार्टअप 1 बिलियन से ज्यादा को पार कर गए हैं।
इन्हें समर्थन मिल रहा है। कुछ साल पहले इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर पा रहा था।

स्टार्टअप संचालक से पूछा- कहां से आया आयडिया : मोदी ने मयूर पाटिल से बात की। मयूर वाहनों का वायु प्रदूषण कम करने और उनका माइलेज बढ़ाने वाला उपकरण बना रहे हैं। मोदी ने पूछा कि आप यह आयडिया कहां से लाए। मयूर ने मोदी को बताया कि मेरे पास एक मोटरसाइकिल थी। माइलेज बढ़ाने के लिए 2011 में कोशिश की। इसका 62 किमी तक माइलेज बढ़ाया मैंने। 2017-18 में हमने टेक्नोलॉजी डेवलप की। बसों में ट्रायल किया। 40 प्रतिशत उत्सर्जन कम हुआ। इस साल पेटेंट भी करा लिया। अटल न्यू इंडिया चैलेंज से 90 लाख रुपए ग्रांट मिली तो काम चालू हो गया। मयूर ने बताया कि मोटरसाइकल का माइलेज 25 किमी था जो हमने 39 किमी कर दिया।

यह भारत का टर्निंग पॉइंट : मोदी ने कहा- कुछ साल पहले कोई कहता था कि कोई कंपनी शुरू करना चाहता है तो परिवार वाले कहते थे नौकरी करो। इसमें सिक्योरिटी है। आज कोई कंपनी शुरू करना चाहता है तो आसपास के लोग उत्साहित होते हैं और पूरा सपोर्ट करते हैं। भारत की ग्रोथ का यह टर्निंग पॉइंट हैं जहां लोग जॉब सीकर्स नहीं जॉब क्रियेटर्स बन रहे हैं। इससे विश्व मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

 

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