Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Breaking News: न्यू ईयर ईव पर देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल; Swiggy, Zomato और Blinkit की सेवाएं ठप

by Tarun Bhardwaj • December 31, 2025
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। साल 2025 की विदाई और नए साल के स्वागत के जश्न के बीच आज देशभर में ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं चरमरा सकती हैं। अपनी बुनियादी मांगों और शोषण के खिलाफ स्विगी, जोमैटो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स ने आज 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। अगर आप भी न्यू ईयर पार्टी के लिए खाना या सामान ऑनलाइन ऑर्डर करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।

हड़ताल क्यों? “हम मशीन नहीं, इंसान हैं”

इंडियन फेडरेशन ऑफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर (IFAT) के नेतृत्व में हो रही इस हड़ताल का मुख्य उद्देश्य कंपनियों की मनमानी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना है। IFAT के राष्ट्रीय महासचिव शेख सलाउद्दीन ने बताया कि 25 दिसंबर को चेतावनी देने के बावजूद कंपनियों ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, जिसके चलते आज यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है।

गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें:

  • अनिवार्य 10-20 मिनट की डिलीवरी टाइम लिमिट खत्म की जानी चाहिए। वर्कर्स का कहना है कि यह मॉडल असुरक्षित और अमानवीय है।
  • प्रति किलोमीटर ₹20 का न्यूनतम भुगतान लागू किया जाना चाहिए। यह सभी बड़े प्लेटफॉर्म पर लागू होना चाहिए।
  • ₹24,000 की न्यूनतम मासिक आय सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • मनमाने ढंग से ID ब्लॉक करने और एल्गोरिदम पेनल्टी को रोका जाना चाहिए, और रेटिंग-आधारित सजा बंद की जानी चाहिए।
  • महिला वर्कर्स को विशेष सुरक्षा और लाभ मिलने चाहिए, जैसे कि मैटरनिटी लीव, ​​इमरजेंसी लीव और बेहतर सुरक्षा उपाय।
  • पीक-आवर का दबाव और स्लॉट सिस्टम खत्म किया जाना चाहिए। वर्कर्स का कहना है कि इससे मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ता है।
  • प्लेटफ़ॉर्म कमीशन 20% तक सीमित होना चाहिए। गिग वर्कर्स ऑटोमैटिक एडवांस रिकवरी का भी विरोध कर रहे हैं।
  • ग्राहक द्वारा ऑर्डर कैंसिल करने पर मुआवजा दिया जाना चाहिए, और इन्हें वर्कर के परफॉर्मेंस मेट्रिक्स में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
  • डिलीवरी टाइमलाइन बढ़ाई जानी चाहिए। AI सपोर्ट के बजाय 24×7 मानव शिकायत निवारण प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
  • उन्हें ‘पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘वर्कर’ के रूप में कानूनी मान्यता दी जानी चाहिए। वर्कर्स चाहते हैं कि उन्हें श्रम कानूनों के तहत अधिकार मिलें।

कमाई में गिरावट

यूनियन लीडर शेख सलाउद्दीन ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन एप्स के एल्गोरिथम के जरिए वर्कर्स का शोषण किया जा रहा है। दूरी और समय के आधार पर मिलने वाले मुआवजे को कम कर दिया गया है, जिससे अब इंसेंटिव पाना लगभग नामुमकिन हो गया है। वर्कर्स को पहले की तुलना में अधिक घंटे काम करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी नेट इनकम (शुद्ध कमाई) लगातार घट रही है। 10 मिनट में डिलीवरी देने के चक्कर में वर्कर्स की जान जोखिम में डाली जा रही है।

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.