यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुंबई स्थित मोगावीरा सहकारी बैंक (Mogaveera Co-operative Bank) की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस सहकारी बैंक की वित्तीय हालत और दैनिक संचालन को लेकर कई गंभीर चिंताएं सामने आई थीं, जिसके बाद जमाकर्ताओं के पैसे को सुरक्षित रखने के लिए यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। आरबीआई द्वारा जारी किए गए ये दिशा-निर्देश 12 जून 2025 को बैंकिंग कारोबार समाप्त होने के बाद से ही पूरे देश में लागू हो गए हैं। यह पाबंदियां फिलहाल अगले 6 महीने तक प्रभावी रहेंगी, हालांकि केंद्रीय बैंक समय-समय पर बैंक के कामकाज की समीक्षा करता रहेगा। खाताधारकों के लिए तय हुई निकासी की सीमा न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक, आरबीआई ने बैंक की मौजूदा नकदी (कैश) स्थिति को ध्यान में रखते हुए जमाकर्ताओं के लिए पैसे निकालने की एक अधिकतम सीमा तय कर दी है। नए नियमों के तहत, अब मोगावीरा सहकारी बैंक का कोई भी ग्राहक अपने बचत खाते (Saving Account), चालू खाते (Current Account) या अन्य किसी भी सावधि खाते से कुल मिलाकर अधिकतम 1 लाख रुपये तक की राशि ही निकाल सकेगा। यह सीमा बैंक के सभी खाताधारकों पर समान रूप से लागू होगी। आरबीआई का स्पष्ट कहना है कि यह फैसला बैंक में उपलब्ध नकदी को संतुलित बनाए रखने और आम जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए लिया गया है। आरबीआई ने लगाए कड़े प्रतिबंध भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के तहत मोगावीरा सहकारी बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं जिससे वह अब कोई भी स्वतंत्र वित्तीय फैसला नहीं ले सकेगा, और इन प्रतिबंधों के तहत बैंक अब किसी भी नए लोन या अग्रिम को मंजूरी नहीं दे सकेगा और न ही मौजूदा ऋणों का नवीनीकरण (रिन्यूअल) कर पाएगा। इसके साथ ही बैंक को किसी भी प्रकार का नया निवेश करने या बाजार में पूंजी लगाने की अनुमति नहीं होगी तथा वह कोई भी नई देनदारी स्वीकार नहीं कर सकेगा और न ही किसी के पक्ष में नया भुगतान कर पाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्रीय बैंक ने मोगावीरा सहकारी बैंक के लिए बाहर से उधार लेने और नए फिक्स डिपॉजिट या जमा स्वीकार करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है, और इन सभी कड़े प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य बैंक की वित्तीय स्थिति को और अधिक गर्त में जाने से रोकना है। लापरवाही पर हुआ एक्शन आरबीआई ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि वह काफी लंबे समय से इस सहकारी बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) और वरिष्ठ प्रबंधन के लगातार संपर्क में था। केंद्रीय बैंक ने बैंक प्रबंधन को कई बार अपनी कार्यप्रणाली, ऋण वसूली और आंतरिक वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए कड़े निर्देश और अवसर दिए थे। इसके बावजूद, बैंक प्रबंधन वित्तीय निगरानी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई भी ठोस या सकारात्मक कदम उठाने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके बाद आरबीआई को यह दंडात्मक कदम उठाना पड़ा। जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता आरबीआई ने Mogaveera Co-operative Bank के ग्राहकों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इन पाबंदियों का मुख्य उद्देश्य बैंक को बंद करना नहीं, बल्कि ग्राहकों और जमाकर्ताओं के गाढ़े खून-पसीने की कमाई की रक्षा करना है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक की हर गतिविधि पर लगातार पैनी नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उचित सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल ग्राहकों को घबराने या पैनिक करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें निकासी सीमा और नए नियमों का पालन करना होगा। आने वाले महीनों में बैंक की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के आधार पर ही इन प्रतिबंधों को हटाने या बढ़ाने पर आगे का फैसला लिया जाएगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: 370-Rupee Biryani Controversy: स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने वीडियो जारी कर फिर मांगी माफी ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]