एकसाथ डबल गुड न्यूज: भारतीय डॉक्‍टर ने खोजी कोरोना की दवा!, इतने दिन में मरीज को कर रहे हैं ठीक

नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस वैक्‍सीन की तलाश के बीच एक अच्‍छी खबर आई है। अमेरिका में एक कंपनी का ट्रायल फेज टू में पहुंच गया है। चीन में एक वैक्‍सीन फेज टू पूरा कर चुकी है और अगले साल की शुरुआत तक मार्केट में उतारी जा सकती है। चीन में अबतक इंसानों पर पांच वैक्‍सीन का टेस्‍ट किया गया है, जो सबसे ज्‍यादा है। वहां की एक और कंपनी Sinovac Biotech का दावा है कि उसकी वैक्‍सीन 99 पर्सेंट असरदार है। रूस अपनी वैक्‍सीन का क्लिनिकल ट्रायल दो हफ्ते के भीतर शुरू कर देगा। वहां अगले हफ्ते से कोविड-19 के मरीजों के इलाज में Avifavir नाम के ड्रग का इस्‍तेमाल होगा।

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वैक्‍सीन बनाने की रेस में ये हैं आगे
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वैक्‍सीन बनाने की रेस चल रही है। करीब 120 वैक्‍सीन पर काम चल रहा है। कम से कम 10 वैक्‍सीन ऐसी हैं जो ह्यूमन ट्रायल के दौर में हैं। दुनिया में कोरोना वायरस केसेज की संख्‍या 64 लाख का आंकड़ा छूने वाली है। यह वायरस अबतक 3.77 लाख से भी ज्‍यादा लोगों को मार चुका है। इसीलिए जल्‍द वैक्‍सीन मिलना बेहद जरूरी है। अबतक जो वैक्‍सीन प्रॉमिसिंग साबित हुई हैं, उनमें चीन की CanSino adenovirus vaccine, Oxford University की adenovirus vaccine, Moderna की mRNA vaccine और Novavax शामिल हैं। इनके अलावा भी कई वैक्‍सीन के शुरुआती रिजल्‍ट्स बेहद प्रभावशाली रहे हैं।

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अमेरिकी कंपनी की वैक्‍सीन जगा रही उम्‍मीद
Moderna की वैक्‍सीन ने आशा की किरण जगाई है। फेज-2 में डिफरेंज ऐजग्रुप के 500 स्‍वस्‍थ लोगों को पहली डोज दे दी गई है। कंपनी ने SARS-CoV-2 वायरस के जेनेटिक मैटीरियल पार्ट का इस्‍तेमाल करके यह mRNA वैक्‍सीन तैयार की है। वैक्‍सीन इंसान के शरीर में वायरस के प्रति इम्‍यून रेस्‍पांस को ट्रिगर करेगी। फेज 1 के ट्रायल में प्रोटेक्टिव एंडीबॉडीज बनने की पुष्टि हुई थी।

वैक्‍सीन डेवलपमेंट में चीन सबसे आगे
चीन में पांच वैक्‍सीन का ट्रायल इंसानों पर हो रहा है। वह इस मामले में दुनिया के बाकी देशों से आगे है। बीजिंग इंस्टीट्यूट आफ बायोलॉजिकल प्रोडक्‍ट्स एंड चीन नैशनल बायोटेक ग्रुप कंपनी की जाइंट वैक्‍सीन ने फेज 2 टेस्टिंग पूरी कर ली है। यह वैक्‍सीन नोवेल कोरोना वायरस के एक मृत वर्जन का इस्‍तेमाल करती है। रॉयटर्स के मुताबिक, वैक्‍सीन साल के आखिर तक या अगले साल की शुरुआत में मार्केट में आ सकती है। प्रोडक्‍शन लाइन के पास हर साल 10-12 करोड़ वैक्‍सीन बनाने की क्षमता है।

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रूस ने बनाई दवा, वैक्‍सीन का ट्रायल जल्‍द
रूसी साइंटिस्‍ट्स ने दो हफ्तों के भीतर वैक्‍सीन का ट्रायल शुरू करने की उम्‍मीद जताई है। वह अमेरिका और ब्राजील के बाद कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित है। करीब 50 तरह की वैक्‍सीन के प्रोजेक्‍ट्स पर अधिकारी मशक्‍कत कर रहे हैं। वैक्‍सीन ट्रायल में हिस्‍सा लेने वाले वालंटियर्स चुने जा चुके हैं। दूसरी तरफ, रूस ने कोविड-19 की एक दवा को भी मंजूरी दी है। Avifavir नाम का यह ड्रग favipiravir के नाम से भी जाना जाता है। एक रूसी कंपनी ने इस ड्रग में थोड़ा सा बदलाव किया है। अगले हफ्ते से मरीजों को यह दवा दी जाने लगेगी।

पूरे विश्व में कोरोना की वैक्‍सीन को लेकर जहां अभी खोज चल ही रही है कि राजस्थान से इसे लेकर एक बड़ी अच्छी खबर आई है। राजस्थान के एक होम्योपैथिक डॉक्टर ने दावा किया है कि उनकी दवाईयों से 7 दिन के अंदर कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं। अब तक 44 मरीजों को ठीक करने का दावा करते हुए डॉ अजय यादव ने अपने अनुभवों को लेकर एक किताब भी लिखी है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उनकी इस कोशिशों की तारीफ़ की है।

भले ही इस कोरोना काल में मरीजों को ठीक करने को लेकर होम्योपैथिक दवाई को कभी बड़ी पहचान नहीं मिली हो, लेकिन अब इसी होम्योपैथिक दवा के जरिये कोरोना संक्रमित 44 मरीजों के ठीक होने का दावा किया गया है। यह दावा जयपुर में प्रस्सिद होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अजय यादव ने किया है। अजय यादव ने दावा किया है कि उन्‍होंने 44 संक्रमित मरीजों को होम्योपैथिक तरीके से ठीक किया है।

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कोरोना की दवा तैयार करने में डेढ़ महीने से ज्यादा वक़्त तक डॉ यादव ने रिसर्च किया है। डॉक्‍टर यादव ने ब्रोमियम यानि ब्रोमीन गैस, क्लोरम यानी क्लोरीन और ओजना यानी प्रकृति को फिल्टर करने वाला ओजन की परत या यूं कहें O3, इन तीनों होम्योपैथिक की दवाई को और मनुष्य के व्यवहार को आपस में मिलाकर रिसर्च किया गया है।

शरीर के अलग-अलग अंगों और लक्षणों के आधार पर इन तीनों दवाओं को मरीज को अलग-अलग दिया जाता है। तीनों ही दवा कोरोना की उसी तरह से काट बनती है, जैसा जहर को जहर मारता है। डॉक्‍टर अजय यादव के अनुसार ब्रोमियम दवाई ओवर हीटेड होती है और तनाव में काम करने वाले कोरोना वारियर्स को क्लोरीन दवाई से जो साईड इफेक्ट आता है, उसे क्लोरम से इम्युनिटी को बढ़ाकर ठीक किया जा सकता है। ये दवा शरीर में प्रवेश करने के साथ ही एचओबीआर और एचओसीएल बनाकर कोरोना वायरस को नष्ट करता है। यादव का दावा यह भी है कि होम्योपैथिक दवाईयां मुनष्य के व्यवहार व उसकी प्रृकृति पर निर्भर करता है, ऐसे में ये कारगर साबित होंगी।

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डॉक्‍टर यादव के इस काम को राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रदीप कुमार बुरड भी आगे बढ़ने का पक्षधर है। उनका कहना है कि महज 7 दिन के अंदर मरीज के सही होने का प्रमाण उन्होंने भी देखा है और इसी कारण से अपने अनुभव के जरिये इसे सरकार को भी बता दिया है। अब सरकार ने WHO को सूचित किया है ताकि इस पर आगे जो भी कागजी काम हो उनको पूरा किया जा सके।

बहरहाल डॉक्‍टर अजय ने मिस्त्री ऑफ़ कोरोना नाम से एक किताब में अपने इस अनुभव को छपवाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दी है ताकि सरकार होम्योपैथीक विधि के जरिये कोरोना को ख़त्म करने की कोशिशो को आगे बढाए। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जबतक कोई अधिकारिक वैक्सिन बाज़ार में नहीं आ जाती, तबतक इन्हीं तरीकों को अपनाकर कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकना होगा।

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