यूनिक समय, नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। रक्षा मंत्रालय की ताजा वार्षिक रिपोर्ट (2025-26) में यह महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे अपने पारंपरिक ट्रेनिंग क्षेत्रों और अग्रिम चौकियों पर अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी की है। राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी बातचीत के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिससे सीमाओं पर शांति और स्थिरता की राह सुगम हो रही है। डिसएंगेजमेंट के बाद डि-एस्केलेशन की ओर कदम रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में शुरू हुई डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया के बाद अब चीनी सेना सीमा पर सैनिकों की संख्या घटाने की भारतीय सेना की 'डि-एस्केलेशन' की दूसरी शर्त पर अमल करती दिख रही है। वर्तमान में एलएसी के पार चीन के इलाकों में पीएलए की 10-10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड तैनात हैं। चीन की एक कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड भारतीय सेना की एक डिवीजन यानी लगभग 14 से 15 हजार सैनिकों के बराबर होती है, जिसमें इंफेंट्री, बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाना, एयर डिफेंस और ड्रोन वॉरफेयर यूनिट्स शामिल हैं। तुलनात्मक स्थिति देखें तो जून 2020 में गलवान घाटी झड़प के समय अकेले पूर्वी लद्दाख में चीन के लगभग 1 लाख सैनिक डटे थे, वहीं अब 3,488 किलोमीटर लंबी पूरी एलएसी पर लगभग 1.5 लाख सैनिक ही रह गए हैं। अब भारतीय सेना 'डि-इंडक्शन' यानी सैनिकों को स्थायी रूप से बैरक में वापस भेजने की तीसरी शर्त पर जोर दे रही है, ताकि सीमा पर गलवान विवाद से पूर्व जैसी स्थिति पूरी तरह बहाल हो सके। अरुणाचल के अपर-सुबानसरी में फेस-ऑफ भले ही उत्तरी सीमा पर कुल सैनिकों की संख्या घटी है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश के अपर-सुबानसरी इलाके में पिछले एक महीने से दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। इस स्थानीय तनाव को दूर करने और गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती बेहद मजबूत स्थिति में है। भारतीय सेना किसी भी आपात स्थिति का करारा जवाब देने के लिए सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है। झांग योक्सिया की बर्खास्तगी और कूटनीतिक सुधार के संकेत शी जिनपिंग द्वारा दिल्ली आने से पूर्व चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के नंबर दो जनरल झांग योक्सिया को हटाया जाना भी सीमा पर आए इस सकारात्मक बदलाव की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जनरल झांग को वर्ष 2017 के डोकलाम विवाद और 2020 के गलवान संघर्ष के समय चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड का नेतृत्व करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाता था। वहीं ब्रिक्स और तियानजिन में आयोजित एससीओ समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय मुलाकातों ने कूटनीतिक सुधार को और गति दी है। इन मुलाकातों में दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की कि आपसी मतभेदों को किसी भी सूरत में विवाद में नहीं बदलना चाहिए और द्विपक्षीय संबंध हमेशा सम्मान, संवेदनशीलता व पारस्परिक हित के सिद्धांतों पर ही आधारित होने चाहिए। शांति बहाली में वर्किंग मैकेनिज्म की भूमिका रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि 'वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन' (WMCC) और स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (SR) स्तर की वार्ताओं ने सीमा पर सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने में मदद की है। बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स (BPM) और कोर कमांडर वार्ता के जरिए स्थानीय मुद्दों को दोस्ताना माहौल में सुलझाया जा रहा है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापारिक व राजनीतिक संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Vrindavan: पर्यटक बस की टक्कर से सब्जी विक्रेता की मौत; गुस्साई ग्रामीणों ने मथुरा-वृंदावन मार्ग किया जाम ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]