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India News: बड़ी खुशखबरी! भारतीय गैस टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर जल्द आ रहा है भारत

by Tarun Bhardwaj • April 4, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। इस तनावपूर्ण माहौल में भारतीय कूटनीति की एक बड़ी जीत सामने आई है। भारी गोलाबारी और समुद्री नाकाबंदी के बीच भारतीय ध्वज वाला विशाल एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ (Green Sanvi) सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार कर गया है। 44,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी से लदा यह जहाज अब सुरक्षित रूप से मुंबई की ओर बढ़ रहा है।

युद्ध के मुहाने से निकला 44,000 टन का ‘खजाना’

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण ‘मौत के गलियारे’ में तब्दील हो चुके होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ 44,000 मीट्रिक टन का ‘खजाना’ लेकर सुरक्षित कॉरिडोर के जरिए बाहर निकल आया है। शुक्रवार को इस संकरे रास्ते को पार करने के बाद अब यह जहाज 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है, जो मार्च महीने में युद्ध की विभीषिका के बीच होर्मुज को पार करने वाला सातवां भारतीय टैंकर बन गया है, जिससे देश में घरेलू रसोई गैस की संभावित किल्लत का बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है।

ईरान के साथ भारत की ‘स्पेशल’ डिप्लोमेसी आई काम

वर्तमान में दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और भारी टोल के बावजूद, भारत और ईरान के बीच गहरी कूटनीतिक दोस्ती का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है, जिसके चलते ईरानी प्रशासन ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को विशेष छूट प्रदान की है। नई दिल्ली और तेहरान के बीच लगातार जारी उच्च स्तरीय वार्ता के कारण ही ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई है, और ‘ग्रीन सान्वी’ की इस बड़ी सफलता के बाद अब भारतीय टैंकर ‘ग्रीन आशा’ व ‘जग विक्रम’ भी इसी सुरक्षित मार्ग से होर्मुज पार कर भारत लौटने की तैयारी में हैं।

अभी भी 17 जहाज फंसे

भले ही ‘ग्रीन सान्वी’ ने सफलतापूर्वक रास्ता पार कर लिया हो, लेकिन फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारतीय ध्वज वाले कुल 17 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जो होर्मुज के पूर्वी हिस्से में खड़े होकर ईरान के क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है, जिसके मद्देनजर भारत सरकार ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए वैकल्पिक रास्तों और रणनीतिक भंडार के प्रभावी इस्तेमाल पर भी काम शुरू कर दिया है।

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