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India News: पवन खेड़ा को बड़ा झटका; सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट की ट्रांजिट जमानत पर लगाई रोक, नोटिस जारी

by Tarun Bhardwaj • April 15, 2026
Major Setback for Pawan Khera

India News: पवन खेड़ा को बड़ा झटका; सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट की ट्रांजिट जमानत पर लगाई रोक, नोटिस जारी

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यूनिक समय, नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा उन्हें दी गई राहत को पलटते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत का यह फैसला असम सरकार द्वारा दायर की गई उस याचिका के बाद आया है, जिसमें पवन खेड़ा को मिली अंतरिम राहत को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर ‘ब्रेक’

बता दें कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें। लेकिन असम सरकार ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने न केवल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, बल्कि पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर जवाब भी तलब किया है।

क्या है विवाद की जड़?

यह कानूनी लड़ाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा से जुड़े आरोपों के बाद शुरू हुई। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कथित तौर पर तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। खेड़ा ने विदेश से प्राप्त कुछ ‘गोपनीय दस्तावेजों’ का हवाला देते हुए इसे एक बड़ा राजनीतिक खुलासा बताया था। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की दलील

असम सरकार की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोप सामान्य नहीं बल्कि अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह के निराधार बयानों से न केवल सार्वजनिक छवि धूमिल होती है, बल्कि जांच प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। सरकार ने मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रांजिट जमानत जैसी राहत तुरंत रद्द की जानी चाहिए।

गरमाती सियासत

इस फैसले के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस पार्टी इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कानूनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। भाजपा का तर्क है कि कानून सबके लिए बराबर है और तथ्यों के बिना किसी की व्यक्तिगत छवि खराब करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।

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