Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

India News: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; ‘शादीशुदा पुरुष का लिव-इन में रहना अपराध नहीं’

by Tarun Bhardwaj • March 27, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शादीशुदा पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो यह कानूनन अपराध नहीं है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि “सामाजिक नैतिकता” नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के कोर्ट के कर्तव्य पर हावी नहीं हो सकती।

कानून और सामाजिक नैतिकता अलग-अलग

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शाहजहांपुर के बालिग जोड़े, अनामिका और नेत्रपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि एक शादीशुदा पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ आपसी सहमति से लिव-इन में रहना कानूनी अपराध नहीं है, और कानून को सामाजिक राय या नैतिकता से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने विपक्षी वकील की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें विवाहित पुरुष के दूसरी महिला के साथ रहने को अपराध बताया गया था, और जोर देकर कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना अदालत का प्राथमिक कर्तव्य है, जिसे सामाजिक मानदंडों के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता।

एसएसपी शाहजहांपुर को कड़ी फटकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पहले से दिए गए सुरक्षा आवेदन पर कार्रवाई न होने पर एसएसपी शाहजहांपुर को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि अपनी मर्जी से साथ रहने वाले वयस्कों की सुरक्षा करना पुलिस का प्राथमिक और अनिवार्य कर्तव्य है।

सुप्रीम कोर्ट के ‘शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ (2018)’ मामले का हवाला देते हुए अदालत ने आदेश दिया कि एसएसपी शाहजहांपुर इस जोड़े की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और साथ ही महिला के परिवार को जोड़े के घर में प्रवेश करने या उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचाने से प्रतिबंधित कर दिया है।

गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनामिका और नेत्रपाल द्वारा दाखिल संयुक्त हलफनामे को स्वीकार करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे उन्हें शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने में BNS, 2023 की धारा 87 के तहत दर्ज अपहरण के मामले में बड़ी राहत मिली है।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे सुरक्षा का मामला मानते हुए राज्य सरकार को 8 अप्रैल, 2026 के लिए नोटिस जारी किया है और तब तक याचिकाकर्ताओं को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: Mathura News: ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में राम जन्मोत्सव की धूम; प्रभु का हुआ पंचामृत अभिषेक

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.

बरसाने में नरदेव चौधरी और थाना प्रभारी के बीच तीखी नोकझोंक Delhi Fire Case: साकेत कोर्ट ने होटल मालिक को 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा हैदराबाद के अमीरपेट में ‘हेलमेट बाजार’ में भीषण अग्निकांड पहले से ज्यादा बोल्ड हुआ फ्रंट डिजाइन और एक्सटीरियर लुक के साथ Toyota Innova Crysta लॉन्च विनेश फोगाट विवाद में WFI को सुप्रीम कोर्ट से झटका केरल में मानसून की धमाकेदार दस्तक, दिग्गज फिल्म निर्माता और पूर्व CBFC चीफ पहलाज निहलानी का 76 वर्ष की उम्र में निधन कोसीकलां में 7 साल की बच्ची के साथ 30 साल के युवक ने की दरिंदगी