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India: ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में बोले पीएम मोदी— “16 अप्रैल से शुरू होने वाला विशेष सत्र महिलाओं को समर्पित”

by Tarun Bhardwaj • April 13, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में शामिल हुए। आगामी 16-18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से ठीक पहले आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। नारी शक्ति वंदन सम्मेलन कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के गायन के साथ हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने देशभर की महिलाओं को ‘नए युग’ के आगमन की बधाई दी।

प्रतीक्षा के अंत का समय

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संसद एक ऐसा नया इतिहास रचने के करीब है, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। पीएम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023 में संसद की नई इमारत में जो पहला कदम (अधिनियम) उठाया गया था, उसे समय से लागू करने और लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ही 16 अप्रैल से विशेष बैठक बुलाई जा रही है।

विपक्ष की सराहना और सहयोग की अपील

पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विपक्ष की भूमिका की भी प्रशंसा की। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में सभी दलों ने एक सुर में इस अधिनियम को पारित किया था। पीएम ने कहा, “विपक्ष के साथियों ने मुखर होकर मांग की थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू होना चाहिए। मुझे विश्वास है कि इस बार भी संवाद और सहयोग से हम संसद की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।”

नेतृत्व में महिलाओं की मिसाल

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उदाहरण देते हुए कहा कि आज देश के सबसे अहम पदों पर महिलाएं आसीन हैं। उन्होंने बताया कि भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में काम कर रही हैं और 21 राज्यों में पंचायतों में उनकी भागीदारी 50% तक पहुंच चुकी है। देश के 42% रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है और मुद्रा योजना के 60% से ज्यादा लोन महिलाओं ने लिए हैं।

वैश्विक स्तर पर भारत की धाक

पीएम ने मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने इसे बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “जब मैं दुनिया के समृद्ध देशों को इस सुविधा के बारे में बताता हूं, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह जाती हैं, क्योंकि वहां भी ऐसी व्यवस्था नहीं है।”

“सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं”

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी इस अवसर पर संबोधित किया। पीएम ने अंत में भावुक होते हुए कहा, “मैं यहाँ उपदेश देने नहीं, बल्कि देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूँ। हमारा संकल्प एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ सामाजिक न्याय सिर्फ नारा न होकर हमारी कार्यसंस्कृति का हिस्सा हो।”

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