यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश के विमानन बुनियादी ढांचे, इमिग्रेशन प्रणाली और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को एक नई ऊंचाई देने के लिए बुधवार को दूरगामी निर्णय लिए हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कुल 30,640 करोड़ रुपये की विशालकाय परियोजनाओं और नीतिगत सुधारों को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों का मुख्य केंद्र बिंदु 'मॉडिफाइड उड़ान योजना' के जरिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सशक्त बनाना, विदेशी यात्रियों के लिए वीजा प्रक्रिया को अत्याधुनिक बनाना और पेरिस समझौते के तहत भारत के पर्यावरण लक्ष्यों को औपचारिक रूप देना है। यह निवेश न केवल देश की आर्थिक गति को तेज करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी और अधिक मजबूत बनाएगा। केंद्रीय कैबिनेट के इन फैसलों में सबसे बड़ा वित्तीय हिस्सा विमानन क्षेत्र के खाते में गया है, जहाँ 28,840 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ 'मॉडिफाइड उड़ान योजना' का शंखनाद किया गया है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों को हवाई मानचित्र पर प्रमुखता से लाना है, जिसके तहत देश भर में 100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह विस्तार न केवल आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा को सुलभ और सस्ता बनाएगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार के लिए भी नए द्वार खोलेगा। क्षेत्रीय हवाई संपर्क में यह क्रांतिकारी बदलाव छोटे शहरों के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। विमानन के साथ-साथ सरकार ने सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए 'इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग' (IVFRT 3.0) योजना को अगले पांच वर्षों के लिए विस्तार दे दिया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाली इस योजना के लिए 1,800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे भारत का वीजा और इमिग्रेशन सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक नेटवर्क से लैस हो जाएगा। इसका सीधा लाभ उन विदेशी पर्यटकों और व्यवसायियों को मिलेगा जो भारत आना चाहते हैं, क्योंकि अब पंजीकरण और ट्रैकिंग की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना यात्रा सुगम हो सकेगी। वित्तीय निवेशों के समानांतर, कैबिनेट ने पर्यावरण के मोर्चे पर भी एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लेते हुए पेरिस समझौते के तहत भारत के 'नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन' (NDC) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय वैश्विक जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है और स्पष्ट करता है कि देश अपनी विकास यात्रा को कार्बन उत्सर्जन में कमी और ग्रीन एनर्जी के संकल्पों के साथ आगे बढ़ाएगा। सरकार का यह कदम भविष्य में कॉरपोरेट जगत की निवेश रणनीतियों को भी सतत विकास और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों की ओर मोड़ने का कार्य करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भारत का निर्माण सुनिश्चित हो सके। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: India News: ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा फैसला; अब PNG वाले क्षेत्रों में बंद होगी LPG सप्लाई [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]