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जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; CJI सूर्यकांत बोले— ‘जवाबदेही तय होना जरूरी’, 8 राज्यों को नोटिस जारी

by Tarun Bhardwaj • July 28, 2026
Jantar Mantar lathi-charge case reaches Supreme Court

जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; CJI सूर्यकांत बोले— ‘जवाबदेही तय होना जरूरी’, 8 राज्यों को नोटिस जारी

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यूनिक समय, नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहुंच गया है। मंगलवार को इस अति-संवेदनशील याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सख्त रुख अपनाया। CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शुरुआत में यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन अचानक एक दिन हिंसा भड़क गई। इसके मुख्य रूप से दो ही कारण हो सकते है। पहला कि पुलिस प्रशासन की तरफ से अत्यधिक सख्ती या बल प्रयोग किया गया, और दूसरा कि प्रदर्शनकारियों के बीच ऐसे असामाजिक या उपद्रवी तत्व घुस आए, जिनका मकसद ही हिंसा भड़काना था।

CJI ने आगे कहा कि जब प्रदर्शनों को संभालने का एक स्पष्ट मानक प्रोटोकॉल (SOP) तैयार हो जाएगा, तब ऐसी घटनाओं में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय करना बहुत आसान हो जाएगा।

याचिकाकर्ता के वकील की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने दलील देते हुए कहा कि पुलिस उग्र तत्वों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन जहां तक संभव हो, बल प्रयोग से बचना चाहिए।

वकील ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे पुलिसकर्मी भी तैनात थे, जो पुलिस यूनिफॉर्म में नहीं थे और उनके हाथों में हथियार थे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सीधा बल प्रयोग भी किया। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former CJI) की निगरानी में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए। प्रदर्शन में शामिल छात्रों और नाबालिगों की डिजिटल टेक्नोलॉजी (फेस रिकग्निशन आदि) से पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर तुरंत रोक लगाई जाए।

अदालत में उठा जुनैद और नाबालिगों की हिरासत का मुद्दा

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ‘जुनैद’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उसे प्रताड़ित किया जा रहा है, हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने इसे एक अलग विषय बताया।

वहीं, एक अन्य अधिवक्ता ने बिहार का उदाहरण देते हुए पीठ को बताया कि वहां 13 साल तक के नाबालिग बच्चों को हिरासत में ले लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, गुजरात और केरल सहित आठ राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं में अभिव्यक्ति के अधिकार (Right to Freedom of Speech) और जीवन के अधिकार (Right to Life) का हवाला दिया गया है। लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के प्रयोग से मीडियाकर्मियों और आम नागरिकों की आंखों को नुकसान पहुंचने की बात भी कही गई है।

सर्वोच्च अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे अपनी जांच जारी रखें, लेकिन फिलहाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक एक्शन (Coercive Action) न लें।

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