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मेक्सिको में शहर के नीचे मिली ‘खोई हुई’ प्राचीन सभ्यता, अनदेखे निशानों से वैज्ञानिक हैरान

by • September 23, 2021
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मेक्सिको सिटी के पास सदियों पहले एक प्राचीन सभ्यता हुआ करती थी। यह तेयॉतिवाकन (Teotihuacan) सभ्यता मेक्सिको सिटी के उत्तरपूर्व में 40 किलोमीटर दूर थी लेकिन इसका ज्यादातर इलाका छिपता चला गया। अब एक नई स्टडी में पाया गया है कि इस सभ्यता के करीब 1500 साल बाद यहां बनीं सड़कों और ढांचों में तेयॉतिवाकन के निशान दिखते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि प्राचीन समाज में इंजिनियरिंग का बेमिसाल काम किया गया था। ये लोग खगोलीय ज्ञान के आधार पर नदियों के रास्ते बनाते थे। शहर बनाने के लिए मिट्टी से लेकर चट्टानों तक को ट्रांसपोर्ट करते थे।

जमीन पर दिखता है काम
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की पुरातत्वविद नावा सूगियामा ने बताया, ‘हम इतिहास में नहीं लेकिन उसके ऐक्शन्स के निशानों में रहते हैं। तेयॉतिवाकन जैसे शहर में उन ऐक्शन्स का जमीन पर नतीजा आज भी दिखता है। LIDAR मैप ने इन प्राचीन फीचर्स क तसवीर दिखाई है जो तेजी से खत्म हो रहे हैं और गायब होने का खतरा झेल रहे हैं। इस तरीके से हम उन्हें संरक्षित कर सकते हैं।’

डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 100 BCE से 550 CE के बीच तेयॉतिवाकन प्राचीन दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक था। यह 21 स्क्वेयर किलोमीटर के इलाके में फैला था और इसमें कई पिरामिड, प्लाजा, कमर्शल और रिहायशी इमारतें थी। कुछ ढांचे आज भी देखे जा सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर गायब हो चुके हैं। LIDAR टेक्नॉलजी की मदद से गायब हो चुके ढांचों के निशान भी देखे जा सकते हैं। इसकी मदद से अंडरग्राउंड ढांचों को लेजर लाइट रिफलेक्ट करके देखा जा सकता है।


प्राचीन निशानों पर बसा शहर
रिसर्चर्स ने इसके लिए LIDAR, जमीनी सर्वे और पहले कलेक्ट किए गए डेटा की मदद से आज के तेयॉतिवाकन घाटी और प्राचीन सभ्यता की तुलना की। उन्होंने पाया कि 65% के शहरी इलाके उसी तरह के ऐंगल पर बने थे जैसे प्राचीन सभ्यता में। प्राचीन दीवारों के निशानों पर आज के ढांचे खड़े किए जा रहे हैं। तेयॉतिवाकन सभ्यता में नदियों की दिशा भी मोड़ी जाती थी और नहरें बनाई जाती थीं। रिसर्च में पाया गया कि आज के पानी के रास्तों में से 16.9 किलोमीटर हिस्से की उत्पत्ति प्राचीन तेयॉतिवाकन लैंडस्केप में दिखती है।

पेपर में कहा गया है कि तेयॉतिवाकन घाटी की पर्यावरण, सांस्कृतिक और अकादमिक बनावट से इंसानों की जमीन को बदलने की क्षमता को समझा जा सकता है। रिसर्च में आकलन किया गया है कि करीब 3,72,056 स्क्वेयर मीटर आर्टिफिशल ग्राउंड 300 साल में बिछाया गया। ऐसे 298 फीचर्स और इंसानों के बनाए 5,795 ढांचे खोजे गए जो पहले रेकॉर्ड्स में नहीं थे। यह भी पता चला कि 200 से ज्यादा फीचर्स खनन में तबाह हो गए।

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