Fri, Jun 5th, 2026
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Mathura News: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर एक अत्यंत प्रभावशाली दृष्टिकोण साझा किया

by Tarun Bhardwaj • April 7, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। धर्मनगरी वृंदावन के पावन सानिध्य में आयोजित मलूकदास महाराज के जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी दृष्टिकोण साझा किया है।

मलूकपीठाधीश्वर आचार्य राजेंद्र दास महाराज द्वारा देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग का उत्तर देते हुए संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि केवल कानून के भरोसे बैठने के बजाय समाज की अंतरात्मा को जगाना अधिक आवश्यक है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि यदि हम समाज को सच्चा ‘गोभक्त’ बनाने में सफल हो जाते हैं, तो गौहत्या जैसी कुरीतियाँ अपने आप समाप्त हो जाएंगी। डॉ. भागवत के अनुसार, समाज को इस दिशा में मानसिक और आध्यात्मिक रूप से इतना सामर्थ्यवान बनाना होगा कि गौ-सेवा उनके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन जाए।

इस परिवर्तनकारी विचार को विस्तार देते हुए संघ प्रमुख ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का उदाहरण दिया और कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए पूरे देश में एक अभूतपूर्व और अटूट जनभावना जागृत हुई थी, ठीक वैसी ही तीव्र और संगठित भावना आज गाय के प्रति दिखनी अनिवार्य है।

उन्होंने इसे एक ‘साहसी कदम’ करार देते हुए तर्क दिया कि जब किसी मुद्दे पर देश की 142 करोड़ की जनता की सामूहिक शक्ति और भावना एक स्वर में खड़ी होती है, तो सरकार के लिए भी उस जनभावना का सम्मान करना और तदनुसार निर्णय लेना अनिवार्य हो जाता है। कानून तो केवल एक माध्यम है, लेकिन असली शक्ति जनता के संकल्प में निहित होती है।

संघ की भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मोहन भागवत ने आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करेगा। संघ का लक्ष्य गाय के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और आर्थिक तत्वों को जन-जन तक पहुँचाना है ताकि प्रत्येक नागरिक गाय के महत्व को गहराई से समझ सके।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संतों के सानिध्य में संघ लोगों के बीच निरंतर जागृति अभियान चलाएगा, जिससे समाज का हर वर्ग गौवंश की रक्षा के लिए स्वयं आगे आए। जब गाय के प्रति श्रद्धा केवल शब्दों तक सीमित न रहकर एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन का रूप ले लेगी, तभी भारत की सांस्कृतिक पहचान और गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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