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Mission 2027: यूपी की सत्ता में वापसी के लिए मायावती का ‘मास्टर प्लान’; 2007 वाला इतिहास दोहराने की तैयारी

by Tarun Bhardwaj • February 7, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। शनिवार (7 फरवरी, 2026) को लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय बैठक में बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को जीत का मंत्र दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी अब ‘मिशन-2027’ को ‘मिशन-2007’ की तर्ज पर हकीकत में बदलने के लिए काम करेगी, ताकि प्रदेश में एक बार फिर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ वाली पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई जा सके।

मायावती ने चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए संगठन के हर स्तर (स्टेट, मंडल, जिला और विधानसभा) पर व्यापक फेरबदल किया है। उन्होंने इस बार ‘मिशनरी’ यानी पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित लोगों को प्राथमिकता देते हुए अहम जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विरोधी पार्टियों के ‘साम-दाम-दंड-भेद’ और कुछ स्वार्थी संगठनों के षड्यंत्रों का डटकर मुकाबला करें।

बीजेपी सरकार पर हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर समाज का हर वर्ग आज दुखी और त्रस्त है। उन्होंने विशेष रूप से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और असुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए याद दिलाया कि बसपा शासनकाल में इस वर्ग को पूरा आदर-सम्मान और उच्च पद दिए गए थे, जबकि वर्तमान में वे अपनी अनदेखी के खिलाफ मुखर हैं। इसके साथ ही, मायावती ने आगामी चुनाव के लिए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को मुख्य एजेंडा बनाने का कड़ा निर्देश दिया है।

‘कानून का राज’ और रोजगार का वादा

बसपा प्रमुख ने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश में जनता बसपा सरकार के उस ‘कानून द्वारा कानून के राज’ की प्रतीक्षा कर रही है, जहाँ अमन-चैन और आत्मसम्मान के साथ विकास होता था। उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार जाने के बाद से प्रदेश में विकास और रोजगार का घोर अभाव है। वर्तमान बजट सत्र का जिक्र करते हुए मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे टकराव, निलंबन और बॉयकॉट की राजनीति की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल-जवाब का मौका मिलना चाहिए ताकि जनता खुद तथ्यों के आधार पर सही-गलत का फैसला कर सके।

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