यूनिक समय, नई दिल्ली। मेघालय में हनीमून के दौरान इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के चर्चित और सनसनीखेज मामले में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सर्वोच्च अदालत से भारी झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका को रद्द करते हुए उसे तीन हफ्ते (21 दिन) के भीतर संबंधित अदालत या जेल में सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निचली अदालत में ट्रायल में अधिक देरी होती है, तो सोनम 6 महीने बाद पुनः जमानत याचिका दाखिल कर सकती है। मेघालय सरकार की याचिका पर हुआ फैसला सोनम रघुवंशी को पूर्व में मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान सोनम के वकील ने तर्क दिया कि मामले में 94 गवाह हैं, जिनमें से केवल 4 के बयान ही दर्ज हो सके हैं। सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की जा चुकी है और सोनम सभी कड़ी शर्तों का पालन कर रही है, अतः उसके फरार होने का कोई खतरा नहीं है। वकील ने यह भी कहा कि सोनम को यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था, न कि उसने स्वयं सरेंडर किया था। मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि आरोपी ने खुद सरेंडर किया था और चार्जशीट में भी इसका जिक्र है। उन्होंने दलील दी कि महज एक धारा के नंबर में हुई टाइपिंग की तकनीकी गलती के आधार पर इतनी गंभीर हत्या की आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। जमानत बरकरार रहने पर आरोपी के फरार होने की पूरी आशंका है। सोनम ने खुद को बताया बेगुनाह पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के सामने विकल्प रखा था कि या तो वह खुद सरेंडर कर दे या कोर्ट उसकी जमानत रद्द करने पर अंतिम आदेश जारी करेगा। इसके जवाब में सोनम रघुवंशी ने हलफनामा दायर कर खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया और कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसने दावा किया कि पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है, इसलिए सिर्फ आरोपों के आधार पर उसकी जमानत खारिज नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी मामले की सुनवाई के दौरान समाज और युवा पीढ़ी की मानसिक स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सॉलिसिटर जनरल के बीच बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी देखने को मिली। जमानत रद्द करते हुए अदालत ने कहा, "बदलते समाज में इस तरह की घटनाएं होना दुखद लेकिन वास्तविकता है। आज की पीढ़ी तकनीक और सूचना के मामले में हमसे काफी आगे और जानकार हो सकती है, लेकिन मानसिक दबाव और तनाव से निपटने के मामले में वह उतनी ही कमजोर साबित हो रही है।" इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज के युवाओं के पास जानकारी (Information) तो बहुत ज्यादा है, लेकिन वास्तविक ज्ञान (Knowledge) की कमी है। जस्टिस वराले ने आगे जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर जो कुछ भी शेयर या फॉरवर्ड किया जा रहा है, दुर्भाग्य से लोग उसी को असली ज्ञान मान ले रहे हैं। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: MLS: मैसी के बिना उतरी इंटर मियामी ने शिकागो फायर को 3-2 से हराया; लेवांडोवस्की का MLS डेब्यू हुआ खराब ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]