यूनिक समय, नई दिल्ली। आधुनिक तकनीक के प्रयोग से देश के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की 'नमो ड्रोन दीदी योजना' के तहत ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि ड्रोन और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना ने न केवल खेती-किसानी के तरीकों को सुलभ बनाया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आय के नए साधन भी विकसित किए हैं। 1,261 करोड़ रुपये का बजट और 15,000 ड्रोन का लक्ष्य योजना का मुख्य उद्देश्य 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (DAY-NRLM) से जुड़ी महिलाओं को कृषि ड्रोन मुहैया कराना है। इस योजना के तहत वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक की अवधि के लिए सरकार ने 1,261 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसके माध्यम से देश के लगभग 14,500 से 15,000 चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इन आधुनिक ड्रोन की सहायता से खेतों में खाद और कीटनाशकों का छिड़काव बेहद कम समय और कम लागत में आसानी से किया जा सकेगा। ड्रोन खरीद पर 80 प्रतिशत तक की केंद्रीय सहायता महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता देने के लिए योजना में कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। योजना के अंतर्गत ड्रोन और उससे संबंधित उपकरणों की कुल लागत पर 80 प्रतिशत यानी अधिकतम 8 लाख रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती है। ड्रोन खरीद की शेष राशि क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से आसान लोन के रूप में जुटाई जा सकती है। इसके अलावा, ड्रोन पैकेज में 4 अतिरिक्त बैटरी सेट, प्रोपेलर, नोजल, फास्ट चार्जर, 1 साल का व्यापक बीमा और 2 साल का मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) भी शामिल रहता है। 15 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग और DGCA लाइसेंस महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को पूरी तरह आत्मनिर्भर और कुशल बनाने के लिए 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके तहत हर समूह से एक महिला को प्रमाणित 'ड्रोन पायलट' और दूसरी महिला को 'ड्रोन असिस्टेंट' के रूप में तैयार किया जाता है। ड्रोन असिस्टेंट को मरम्मत व रखरखाव की जानकारी दी जाती है, जबकि पायलट को संचालन सिखाया जाता है। इसके साथ ही, प्रशिक्षित महिलाओं को DGCA-अनुमोदित ड्रोन पायलट लाइसेंस भी दिलाया जाता है, जिससे उनकी एक नई तकनीकी पहचान बनती है। उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर, कर्नाटक पहले पायदान पर जनवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देशभर में अब तक 1,094 कृषि ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं। इस सूची में कर्नाटक 145 ड्रोन दीदियों के साथ देश में पहले स्थान पर काबिज है। वहीं उत्तर प्रदेश 128 ड्रोन दीदियों के साथ दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है, जहां अकेले प्रयागराज के फूलपुर में 90 महिलाओं को Marut Drones द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश 108 और हरियाणा 102 ड्रोन दीदियों के साथ देश के अन्य प्रमुख राज्यों में शामिल हैं। रोजगार और कमाई का नया जरिया ड्रोन संचालन से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। एक ड्रोन टीम प्रतिदिन औसतन 20 एकड़ खेत में छिड़काव कर सकती है। स्वयं सहायता समूह स्थानीय किसानों को किराये पर छिड़काव की सेवा देकर नियमित आय अर्जित कर रहे हैं, जिससे खेती में आधुनिकता के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: एशियन गेम्स से बाहर होने के बाद वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी का भावुक वीडियो वायरल; लगाए गंभीर आरोप ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]