Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Shankaracharya Controversy: अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने सीएम योगी के सम्मान में दिया इस्तीफा

by Tarun Bhardwaj • January 27, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अयोध्या में तैनात जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दिखाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रहे विवाद में एक बड़ा वैचारिक मोड़ है।

प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल को संबोधित अपने दो पन्नों के भावुक त्यागपत्र में स्पष्ट किया कि वे शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री पर की गई अभद्र टिप्पणियों और अनर्गल आरोपों से गहरे आहत हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि एक लोकसेवक कोई रोबोट नहीं होता जिसके पास अपनी संवेदनाएं न हों; जिस सरकार से उन्हें वेतन मिलता है और जिस प्रदेश का वह नमक खाते हैं, उसके लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मुखिया का अपमान उनके लिए असहनीय है।

प्रशांत कुमार सिंह का यह कदम उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में एक नई बहस को जन्म दे रहा है क्योंकि उन्होंने अपने पद को छोड़ने का निर्णय केवल इसलिए लिया ताकि वे खुलकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर सकें। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले तीन दिनों से वे इस पूरे विवाद के कारण मानसिक रूप से काफी व्यथित थे और अंततः उन्होंने अपने स्वाभिमान और कर्तव्य बोध के लिए सेवा से मुक्त होने का रास्ता चुना। इस्तीफे के बाद उन्होंने समाजसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पद से हटने के बाद वे अपने निजी संसाधनों के जरिए समाज के उत्थान के लिए कार्य करेंगे।

यह मामला इसलिए भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों और यूजीसी के नए नियमों से असहमति जताते हुए अपना इस्तीफा भेजा था। जहाँ एक तरफ अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा सरकार के विरोध के रूप में देखा जा रहा है, वहीं प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में एक सुरक्षा कवच बनकर उभरा है।

एक ही विवाद को लेकर दो अलग-अलग जिलों के बड़े अधिकारियों द्वारा इस्तीफा देने की इस घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें राजभवन पर टिकी हैं कि इन इस्तीफों पर क्या अंतिम फैसला लिया जाता है, लेकिन फिलहाल यह विवाद धर्म, राजनीति और प्रशासन के एक जटिल त्रिकोण में फंसता नजर आ रहा है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: भारत-EU व्यापार समझौते मदर ऑफ ऑल डील्स के बाद यूरोपीय कारों पर टैक्स हुआ कम; गाड़ियों के शौकीनों की लगी लॉटरी

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.