यूनिक समय, मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान बनाम शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली प्रस्तावित सुनवाई एक बार फिर टल गई है। शनिवार को निर्धारित तिथि पर पक्षकारों की ओर से संशोधन प्रार्थना पत्रों पर जवाब दाखिल किया जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों और प्रक्रिया पूरी न हो पाने की वजह से न्यायालय के समक्ष जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए मामले की गंभीरता को समझते हुए अब अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल, 2026 की तारीख मुकर्रर की है। इस कानूनी देरी के कारण अब स्वामित्व और अधिकारों से जुड़ी दलीलों के लिए पक्षकारों को कुछ और दिनों का इंतजार करना होगा। हिंदू पक्ष के प्रमुख पैरोकार और अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुनवाई के दौरान संशोधन प्रार्थना पत्रों पर प्रतिउत्तर (जवाब) दाखिल होना अनिवार्य था, परंतु किन्हीं अपरिहार्य कारणों से यह प्रक्रिया शनिवार को पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसी दिन न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार किया जाए या नहीं। यह विवाद पिछले काफी समय से देश की सबसे बड़ी कानूनी लड़ाइयों में से एक बना हुआ है, जिसमें जन्मस्थान परिसर की भूमि के मालिकाना हक और शाही ईदगाह के निर्माण को लेकर ऐतिहासिक व पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह विवाद पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। इस मामले में एएसआई (ASI) के सर्वे से लेकर मंदिर की प्राचीनता तक के कई बिंदु न्यायालय के विचाराधीन हैं। हाल के दिनों में इस केस में कई नए मोड़ आए हैं, जिसके चलते हिंदू पक्ष ने अपनी याचिकाओं में कुछ संशोधनों की मांग की थी। अब 10 अप्रैल की तारीख न केवल मथुरा बल्कि पूरे देश के धार्मिक और कानूनी हलकों के लिए बड़ी खबर लेकर आ सकती है, क्योंकि इसी दिन हाईकोर्ट तय करेगा कि केस की दिशा और दशा क्या होगी। प्रशासन भी इस संवदेनशील मुद्दे को लेकर पूरी तरह सतर्क है और कोर्ट परिसर से लेकर मथुरा तक सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जा रही है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Tech: 1 अप्रैल से बदल जाएगा ऑनलाइन पेमेंट का तरीका; अब केवल OTP से नहीं चलेगा काम, लागू होगा ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’