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अब पेट्रोल की जगह एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां; सरकार ने E85 और E100 फ्यूल के लिए जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

by Tarun Bhardwaj • April 29, 2026
Government Issues Draft Notification for E85 and E100 Fuels

अब पेट्रोल की जगह एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां; सरकार ने E85 और E100 फ्यूल के लिए जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

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यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत सरकार देश की ऊर्जा निर्भरता को बदलने और पेट्रोल-डीजल के आयात बिल को कम करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को बढ़ाकर E85 (85% एथेनॉल) और यहां तक कि E100 (100% एथेनॉल) तक ले जाना है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भविष्य में गाड़ियां पूरी तरह से एथेनॉल पर चल सकेंगी।

क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?

मंत्रालय ने 27 अप्रैल को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस नए बदलाव के तहत अब E85 के साथ-साथ E100 फ्यूल के लिए भी वाहनों के मानक (Standards) तय किए जाएंगे। केवल पेट्रोल ही नहीं, बल्कि B100 (100% बायोडीजल) के लिए भी नियम जोड़े गए हैं। सरकार हाई-ब्लेंड फ्यूल की पूरी रेंज को तकनीकी और कानूनी रूप से सपोर्ट करने के लिए नियम बना रही है।

इंपोर्ट बिल में आएगी भारी कमी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संसद में एथेनॉल ब्लेंडिंग की सफलता का जिक्र करते हुए बताया था कि एक दशक पहले एथेनॉल ब्लेंडिंग मात्र 1-2% थी, जो अब बढ़कर 20% (E20) हो चुकी है। इस बदलाव के कारण भारत को सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा की भारी बचत हो रही है। सरकार का अगला लक्ष्य इस सीमा को और बढ़ाकर कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है।

नितिन गडकरी की चेतावनी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन निर्माताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले समय में पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर चलने वाली गाड़ियों का भविष्य धुंधला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और बायोफ्यूल तकनीक की ओर शिफ्ट करें। नितिन गडकरी ने कहा “पेट्रोल और डीजल न सिर्फ महंगे हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी गंभीर समस्या बन रहे हैं।”

क्या होगा असर?

एथेनॉल का उत्पादन स्वदेशी (गन्ने और अनाज से) होने के कारण यह पेट्रोल के मुकाबले किफायती विकल्प हो सकता है। एथेनॉल जलने पर कार्बन उत्सर्जन बहुत कम करता है, जिससे शहरों की हवा साफ होगी। हाई एथेनॉल ब्लेंड (E85/E100) पर गाड़ी चलाने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की आवश्यकता होगी। मौजूदा गाड़ियों में इसके लिए कुछ तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं।

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