विजयादशमी: श्रीराम की पूजा से मिलता है हर सुख, जानें विधि, मुहूर्त और आरती

विजयादशमी यानी दशहरे पर कई परंपराओं का पालन किया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण का वध किया था। इसीलिए इस पर्व पर रावण दहन से पहले भगवान श्रीराम की पूजा भी की जाती है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है और मनोकामना सिद्धि भी होती है। दशहरे पर भगवान श्रीराम की पूजा विधि इस प्रकार करें और जानें शुभ मुहूर्त…

पूजा के शुभ मुहूर्त
– सुबह 9.30 से दोपहर 12 बजे तक
– दोपहर 2 से 2.50 तक
– दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक

इस विधि से करें श्रीराम की पूजा
दशहरे की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद ऊपर बताए गए किसी मुहूर्त में घर में एक एक साफ स्थान पर भगवान श्रीराम व माता सीता की प्रतिमा को स्थापित करें। इनकी गंध, चावल, फूल, धूप, दीप से पूजा करें।
– इसके बाद ये मंत्र बोलें-
मंगलार्थ महीपाल नीराजनमिदं हरे।
संगृहाण जगन्नाथ रामचंद्र नमोस्तु ते।।
ऊँ परिकरसहिताय श्रीसीतारामचंद्राय कर्पूरारार्तिक्यं समर्पयामि।

किसी पात्र (बर्तन) में कपूर तथा घी की बत्ती (एक या पांच अथवा ग्यारह) जलाकर भगवान श्रीसीताराम की आरती उतारें व गाएं-
आरती कीजै श्रीरघुबर की, सत चित आनंद शिव सुंदर की।।
दशरथ-तनय कौसिला-नंदन, सुर-मुनि-रक्षक दैत्य निकंदन,
अनुगत-भक्त भक्त-उर-चंदन, मर्यादा-पुरुषोत्तम वरकी।।
निर्गुन सगुन, अरूप, रूपनिधि, सकल लोक-वंदित विभिन्न विधि,
हरण शोक-भय, दायक सब सिधि, मायारहित दिव्य नर-वरकी।।
जानकिपति सुराधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक-गति,
विश्ववंद्य अनवद्य अमित-मति, एकमात्र गति सचारचर की।।
शरणागत-वत्सलव्रतधारी, भक्त कल्पतरु-वर असुरारी,
नाम लेत जग पवनकारी, वानर-सखा दीन-दुख-हरकी।।

आरती के बाद हाथ में फूल लेकर यह मंत्र बोलें-
नमो देवाधिदेवाय रघुनाथाय शार्गिणे।
चिन्मयानन्तरूपाय सीताया: पतये नम:।।
ऊँ परिकरसहिताय श्रीसीतारामचंद्राय पुष्पांजलि समर्पयामि।

फूल भगवान को चढ़ा दें और यह श्लोक बोलें
यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यादिकानि च।
तानि तानि प्रणशयन्ति प्रदक्षिणपदे पदे।।

इसके बाद भगवान श्रीराम को प्रणाम करें और कल्याण की प्रार्थना करें। इस प्रकार भगवान श्रीराम का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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