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Mathura News: राधावल्लभ मंदिर में पुरुषोत्तम मास की धूम; चंदन उत्सव पर ठाकुरजी का हुआ मनोहारी श्रृंगार

by Tarun Bhardwaj • May 18, 2026
Celebration of Purushottam month in Radhavallabh temple

Mathura News: राधावल्लभ मंदिर में पुरुषोत्तम मास की धूम; चंदन उत्सव पर ठाकुरजी का हुआ मनोहारी श्रृंगार

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यूनिक समय, मथुरा। श्री धाम वृंदावन के सुप्रसिद्ध ठाकुर श्री राधावल्लभ मंदिर में इन दिनों पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। इसी श्रृंखला में 18 मई को श्री राधावल्लभ मंदिर परिसर में अत्यंत भक्तिभाव, पारंपरिक रीति-रिवाज और हर्षोल्लास के साथ भव्य ‘चंदन उत्सव’ मनाया गया।

ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव को देखते हुए इस विशेष दिन ठाकुर श्री राधावल्लभ लाल को सर्वांग चंदन का मनोहर और अलौकिक श्रृंगार अर्पित किया गया। चंदन के इस अद्भुत लेपन और दिव्य श्रृंगार के गवाह बने हजारों देश-विदेश से आए श्रद्धालु ठाकुरजी की मनमोहिनी छवि को निहारकर पूरी तरह भावविभोर हो उठे, जिससे पूरा देवालय दिव्य सुगंध और भक्ति रस में सराबोर नजर आया।

शीतलता प्रदान करने के लिए ठंडाई प्रसाद

चंदन उत्सव के इस पावन मौके पर मंदिर प्रबंधन और सेवायतों द्वारा ठाकुरजी के दर्शनार्थ आए देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। भीषण गर्मी को देखते हुए भक्तों को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर केसर-बादाम युक्त ठंडाई प्रसाद का वितरण अत्यंत प्रेमपूर्वक किया गया।

इसके साथ ही, अधिक मास के विशेष महत्व को ध्यान में रखते हुए मंदिर में ‘राजभोग ब्राह्मण प्रसाद सेवा’ भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गई। सेवा, समर्पण और निश्छल भक्ति का यह अनूठा संगम वहां मौजूद हर भक्त के हृदय को छूने वाला और एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति कराने वाला साबित हुआ।

पुरुषोत्तम मास में सेवा-भक्ति से मिलता है अक्षय पुण्य

इस पावन अवसर पर अधिक मास के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मंदिर के सेवायत श्रीहित अभय गोस्वामी जी ने बताया कि सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को भगवान की विशेष कृपा और सानिध्य प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ और पवित्र समय माना गया है।

उन्होंने कहा कि चूंकि इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम (श्री हरि) हैं, इसलिए इस पूरे माह में की जाने वाली निस्वार्थ सेवा, ठाकुरजी का नाम जप, संकीर्तन, दान-पुण्य और विभिन्न उत्सवों में सहभागिता करने से भक्तों को सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। गोस्वामी जी ने भक्तों का आह्वान किया कि वे इस पावन मास में ठाकुरजी के विविध मनोरथों, उत्सवों और दिव्य सेवाओं का साक्षी बनकर अपने जीवन में परम आध्यात्मिक आनंद और अक्षय पुण्य अर्जित करें।

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