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Vrindavan: संगीत की स्वर लहरियों के साथ मना ‘बसंतोत्सव; ध्रुपद-धमार के प्राचीनतम पद ने जीता दिल

by Tarun Bhardwaj • January 24, 2026
Celebrating 'Basantotsav' with the sound of music

Vrindavan: संगीत की स्वर लहरियों के साथ मना ‘बसंतोत्सव; ध्रुपद-धमार के प्राचीनतम पद ने जीता दिल

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यूनिक समय, वृंदावन। गुरु अजनेश्वरधाम भागवत संगीत विद्यापीठ एवं श्रीगोपाल संगीत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बसंतोत्सव कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संरक्षक डॉ. हरेकृष्ण शर्मा ‘शरद’ ने कहा कि ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल साधन संगीत ही है।

इस अवसर पर संत किशोरीशरण भक्तमाली (मुखियाजी) ने राग बसंत में ध्रुपद-धमार के प्राचीनतम पद सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. रामश्याम युगलबंधु ने बताया कि बच्चों की प्रतिभा निखारने और उन्हें उचित मंच प्रदान करने के उद्देश्य से यह बसंतोत्सव आयोजित किया गया है।

समारोह में छात्र-छात्राओं ने यमन एवं भीमपलासी रागों में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान भागवताचार्य डॉ. मुकेश मोहन शास्त्री, तरुणकृष्ण, प्रिया शर्मा, नंदिनी शर्मा, शिवानी शर्मा, वैष्णवी, निकेश, उद्धव, दीपिका, दीपांशी, संस्कार, चाणक्य, ब्रजकिशोर तथा रिया व अनुराधा शर्मा आदि ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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