
यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाते हुए 111 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद इन नामों पर अंतिम मुहर लगी। इस सूची के साथ ही भाजपा अब तक कुल 255 सीटों पर अपने योद्धाओं के नाम घोषित कर चुकी है, जिससे यह साफ है कि पार्टी बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती।
प्रमुख चेहरों और सीटों में बड़े फेरबदल
भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में कई महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं, जिसमें संदेशखली आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं रेखा पात्रा को इस बार संदेशखली के बजाय हिंगलगंज (अजा) सीट से मैदान में उतारा गया है।
पार्टी ने अनुभव पर दांव खेलते हुए पूर्व गृह राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक को माथाभांगा (अजा), पूर्व सांसद अर्जुन सिंह को नोआपारा और रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से उम्मीदवार बनाकर दिग्गजों की वापसी कराई है। वहीं, ममता बनर्जी के खिलाफ उपचुनाव लड़ चुकीं प्रियंका टिबरेवाल अब एंटाली सीट से चुनाव लड़ेंगी, जबकि दिव्येन्दु अधिकारी को एगरा से टिकट देकर भाजपा ने मेदिनीपुर क्षेत्र में अधिकारी परिवार के दबदबे को और मजबूत किया है।
सूची के अन्य महत्वपूर्ण नाम
भाजपा ने पश्चिम बंगाल के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए उत्तर बंगाल में दधिराम रॉय (मेकलीगंज), लक्ष्मण लिंबू (मदारीहाट) और भरत छेत्री (कलिम्पोंग) जैसे स्थानीय चेहरों पर भरोसा जताया है।
कोलकाता और उपनगरों की महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी ने डॉ. शरदवत मुखर्जी (बिधाननगर), तरुण ज्योति तिवारी (राजरहाट गोपालपुर) और डॉ. इंद्रनील खान (बेहाला पश्चिम) को मौका देकर शहरी मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की है। वहीं, जगद्दल सीट से पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. राजेश कुमार को चुनावी रण में उतारकर भाजपा ने प्रशासनिक अनुभव और स्वच्छ छवि के साथ मुकाबला और भी रोचक बना दिया है।
रणनीतिक समीकरण
इससे पहले भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। अब 111 नए नामों के साथ पार्टी ने राज्य की अधिकांश महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस सूची में एससी (SC) और एसटी (ST) आरक्षित सीटों पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके। उम्मीदवारों में डॉक्टरों, वकीलों और पूर्व अधिकारियों की बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि भाजपा इस बार ‘शिक्षित और सशक्त बंगाल’ के विजन के साथ जनता के बीच जा रही है।
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