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IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक पर जताई चिंता; बोले “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने कंटेंट हटाने की रफ्तार की तिगुनी”

by Tarun Bhardwaj • March 30, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। एआई (AI) के दौर में बढ़ते साइबर खतरों के बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘डीपफेक’ को समाज के लिए एक नया और गंभीर खतरा करार दिया है। सोमवार को एक महत्वपूर्ण संबोधन में उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए तैयार किए जा रहे ये फर्जी वीडियो और तस्वीरें न केवल व्यक्तियों की निजता का हनन कर रहे हैं, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे के लिए एक चुनौती बन गए हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार के कड़े रुख के बाद अब सोशल मीडिया दिग्गज भी हरकत में आए हैं और उन्होंने डीपफेक कंटेंट को पहचानने और उसे प्लेटफॉर्म से हटाने की अपनी कार्रवाई को दो से तीन गुना तक तेज कर दिया है।

अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि डीपफेक एक ऐसी खतरनाक तकनीक है, जिसका उपयोग किसी व्यक्ति की फोटो, आवाज या वीडियो को डिजिटल रूप से बदलकर बिल्कुल असली जैसा दिखने वाला ‘फर्जी रूप’ देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस ‘डिजिटल अभिशाप’ से प्रभावी ढंग से निपटना हर संस्थान और नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। एआई की दुनिया में हो रहे तीव्र बदलावों के कारण अब बड़ी मात्रा में भ्रामक कंटेंट प्रसारित हो रहा है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर तकनीकी सुरक्षा कवच तैयार किए जा रहे हैं।

पश्चिम एशिया संकट और टेक इंडस्ट्री

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया (इजरायल-ईरान-अमेरिका) में जारी तनाव के बीच वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग पर पड़ने वाले असर को लेकर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। हीलियम की कमी और ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने की खबरों के बीच अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार लगातार उच्च प्रौद्योगिकी संगठनों और उद्योग निकायों के संपर्क में है। सेमीकंडक्टर, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे और हार्डवेयर जैसे प्रमुख क्षेत्रों के संगठनों ने अब तक अपने संचालन पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की सूचना नहीं दी है।

आईटी मंत्री के अनुसार, भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि पश्चिम एशिया का यह संकट लंबा नहीं खिंचेगा, जिससे सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए मंत्रालय हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और उद्योग संगठनों के साथ निरंतर संवाद जारी रखा जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करना है कि भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के उभरते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने के सपने पर न पड़े।

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