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Asha Bhosle: पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोंसले; राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

by Tarun Bhardwaj • April 13, 2026
Asha Bhosle Merges with the Five Elements

Asha Bhosle: पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोंसले; राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

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यूनिक समय, नई दिल्ली। सुरों की दुनिया की बेताज मलिका और भारतीय संगीत का गौरव आशा भोंसले सोमवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गईं। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उनके बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हजारों प्रशंसकों और गणमान्य लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल ‘आशा ताई अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

गीतों के बीच मिली भावुक विदाई

आशा ताई का अंतिम सफर वैसा ही था जैसा उन्होंने अपना जीवन जिया—सजीव और सुरों से भरपूर। अंतिम विदाई के समय संगीत जगत के दिग्गज शान और अनूप जलोटा समेत कई कलाकारों ने उनके ही कालजयी गीत गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह एक ऐसा दुर्लभ और भावुक क्षण था जहां संगीत के जरिए ही अपनी गुरु को अंतिम विदाई दी गई।

उनके अंतिम दर्शन के लिए राजनीति, खेल और सिनेमा जगत की बड़ी हस्तियां पहुंचीं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, संगीत सम्राट एआर रहमान, सचिन तेंदुलकर, रणवीर सिंह, तब्बू, विक्की कौशल और अनुराधा पौडवाल जैसे दिग्गजों ने उन्हें नमन किया।

महानायक की भावुक श्रद्धांजलि

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के जरिए आशा ताई को याद करते हुए एक बेहद भावुक संदेश साझा किया। “एक पूरा युग, एक अविश्वसनीय और विलक्षण व्यक्तित्व कल खो गया। हर गीत को जीवंत कर देने की उनकी अद्भुत प्रतिभा अब स्वर्ग सिधार गई है। वे हमारे लिए शाश्वत संगीत का एक संपूर्ण ज्ञानकोश छोड़ गई हैं। उनका शरीर चला गया है, लेकिन उनकी आवाज और आत्मा हमेशा अमर रहेगी।”

स्वास्थ्य और अंतिम क्षण

92 वर्षीय आशा जी पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। 11 अप्रैल को सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया, लेकिन रविवार को ‘मल्टी-ऑर्गन फेलियर’ के कारण उन्होंने इस नश्वर संसार को त्याग दिया।

संघर्ष से सफलता का ‘स्वर-सफर’

आशा भोंसले का जीवन मात्र एक करियर नहीं, बल्कि अटूट इच्छाशक्ति की मिसाल था।उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ मराठी फिल्म में अपना पहला गाना ‘चला चला नव बाल’ गाया था। 16 साल की उम्र में फिल्म ‘रात की रानी’ से उन्हें असली पहचान मिली। आठ दशकों के सफर में उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली और अन्य भाषाओं में 12,000 से अधिक गानों को अपनी जादुई आवाज दी।

एक युग का अंत

आशा ताई का जाना भारतीय संगीत के एक ऐसे अध्याय का बंद होना है जिसे दोबारा नहीं लिखा जा सकता। उनके जाने से न केवल एक परिवार बल्कि पूरा राष्ट्र अनाथ महसूस कर रहा है। उनकी खनकती आवाज अब केवल हमारे रिकॉर्ड्स और यादों में जिंदा रहेगी।

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