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Bangladesh: राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द दे सकते हैं इस्तीफा; शेख हसीना से संपर्क के बाद बढ़ा दबाव

by Tarun Bhardwaj • July 23, 2026
President Mohammed Shahabuddin may resign soon

Bangladesh: राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द दे सकते हैं इस्तीफा; शेख हसीना से संपर्क के बाद बढ़ा दबाव

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यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद शुरू हुआ राजनीतिक घटनाक्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर संपर्क साधने की खबरों के बाद उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव है। उल्लेखनीय है कि शहाबुद्दीन अवामी लीग के दौर के अकेले ऐसे शीर्ष नेता हैं, जो जुलाई-अगस्त 2024 के उथल-पुथल भरे जनविरोध के बाद भी अपने पद पर बने हुए थे।

शेख हसीना से फोन पर बातचीत बनी इस्तीफे की वजह

सत्तारूढ़ ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तारिक रहमान की सरकार राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के पद पर बने रहने से असहज है। स्थानीय मीडिया आउटलेट्स, जैसे ‘प्रोथोमोलो’ और ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, हाल ही में शहाबुद्दीन द्वारा भारत में रह रही शेख हसीना से फोन पर बातचीत करने और हसीना के बांग्लादेश लौटने के बयान के बाद परिस्थितियां तेजी से बदली हैं।

इस महीने की शुरुआत में शेख हसीना ने साल के अंत तक ढाका लौटने की इच्छा जताई थी, जिसके जवाब में मौजूदा बांग्लादेश सरकार ने स्पष्ट किया था कि यदि वह लौटती हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और सीधे जेल भेजा जाएगा। बता दें कि शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में ढाका की एक अदालत मौत की सजा सुना चुकी है।

इस्तीफे के बाद कौन संभालेगा कमान?

बांग्लादेशी संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने पद से त्यागपत्र देते हैं, तो नए राष्ट्रपति का चुनाव होने तक संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) हाफिजुद्दीन अहमद कार्यवाहक/अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभालेंगे।

अप्रैल 2023 में चुने गए थे राष्ट्रपति

मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान 5 वर्षों के लिए बांग्लादेश का राष्ट्रपति चुना गया था। हालांकि, अगस्त 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग की सरकार गिर गई और शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। सरकार बदलने के बाद अवामी लीग शासन के दौर के लगभग सभी प्रमुख अधिकारियों और नेताओं को अपने पद गंवाने पड़े थे, लेकिन शहाबुद्दीन उस दौर से अब तक पद पर बने हुए थे। अब लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उनका इस्तीफा तय माना जा रहा है।

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