Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Bengal Chunav: चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों का नाम वोटर लिस्ट से ‘गायब’; सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार

by Tarun Bhardwaj • April 24, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के गहमागहमी के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चुनाव ड्यूटी पर तैनात जिन अधिकारियों के कंधों पर निष्पक्ष मतदान कराने की जिम्मेदारी है, उनमें से कई अधिकारियों के नाम ही मतदाता सूची (SIR) से काट दिए गए हैं। इस विडंबना को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दखल देने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ताओं को संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास जाने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल के 65 चुनाव अधिकारियों से जुड़ा है। इन अधिकारियों की दलील है कि वे दिन-रात चुनाव की तैयारियों को सफल बनाने में जुटे हैं, लेकिन जब खुद मतदान करने की बारी आई, तो उन्हें पता चला कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

अधिकारियों के वकील एम. आर. शमशाद ने कोर्ट को बताया कि इन अधिकारियों के ‘ड्यूटी ऑर्डर’ पर बाकायदा उनका EPIC (वोटर आईडी) नंबर दर्ज है। यदि प्रशासन ने उन्हें वैध मतदाता मानकर ही चुनाव ड्यूटी पर लगाया है, तो फिर मुख्य मतदाता सूची से उनके नाम कैसे गायब हो गए? याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए लिस्ट से बाहर कर दिया गया, जो उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए तुरंत राहत देने के बजाय उन्हें ट्रिब्यूनल भेजने का फैसला किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले अपीलीय प्राधिकरण के पास जाना चाहिए ताकि मामले की विस्तार से सुनवाई हो सके।
जस्टिस बागची ने एक कड़वी सच्चाई की ओर संकेत करते हुए कहा कि शायद ये अधिकारी इस मौजूदा चुनाव में वोट न डाल पाएं, लेकिन भविष्य के लिए मतदाता सूची में उनका नाम बने रहने का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।

लोकतंत्र के प्रहरियों की बेबसी

अदालत में दलील दी गई कि जो लोग चुनावी मशीनरी का हिस्सा हैं और पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने का जिम्मा संभाल रहे हैं, उन्हें ही मतदान के अधिकार से वंचित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने गुहार लगाई थी कि उन्हें वोट डालने का मौका दिया जाए, लेकिन तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से फिलहाल उन्हें कोई फौरी राहत नहीं मिल सकी है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: Mathura News: बदमाशों ने छत के रास्ते घर में घुसकर परिवार को बनाया बंधक, लाखों की नकदी और जेवरात लूटकर हुए फरार

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Delhi Fire Case: साकेत कोर्ट ने होटल मालिक को 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा हैदराबाद के अमीरपेट में ‘हेलमेट बाजार’ में भीषण अग्निकांड पहले से ज्यादा बोल्ड हुआ फ्रंट डिजाइन और एक्सटीरियर लुक के साथ Toyota Innova Crysta लॉन्च विनेश फोगाट विवाद में WFI को सुप्रीम कोर्ट से झटका केरल में मानसून की धमाकेदार दस्तक, दिग्गज फिल्म निर्माता और पूर्व CBFC चीफ पहलाज निहलानी का 76 वर्ष की उम्र में निधन कोसीकलां में 7 साल की बच्ची के साथ 30 साल के युवक ने की दरिंदगी मुजफ्फरपुर में प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 5 लोगों की मौत