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शौक बड़ी चीज है! स्टेशन पर गाड़ी छोड़ ठेके पर दारू पीते मिला ड्राइवर, इसलिए भी लेट होती हैं ट्रेनें

by Raju Chaurasia • May 3, 2022
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पटना। बिहार में पिछले कुछ दिनों में दूसरा मामला मामला सामने आया है, जिसमें ट्रेन के ड्राइवर ने अपना शौक पूरा करने ट्रेन रोक दी। कहते हैं कि ‘शौक बड़ी चीज है!’ चाहे वो चाय की हो या दारू की। बिहार से गुजरने वाली ट्रेनों के ड्राइवर को शायद अधिक तलब लगती है। पिछले दिनों चाय पीने के लिए बीच में ट्रेन रोकने का मामला सामने आया था, अब एक ड्राइवर ने शराब की तलब लगने पर ट्रेन को ब्रेक लगा दिए।

यह मामला समस्तीपुर-खगड़िया रेलखंड के हसनपुर रोड रेलवे स्टेशन का है। यहां एक यात्री ट्रेन के ड्राइवर को शराब की ऐसी तलब लगी कि वो ट्रेन छोड़कर चला गया। करीब घंटेभर ट्रेन खड़ी रही। इसके बाद यात्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामले की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची। पुलिस ने सहायक लोको पायलट को गिरफ्तार कर लिया है। उसका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसनपुर में मेडिकल कराया गया। आरोपी की पहचान समस्तीपुर प्रखंड के जितवारपुर निवासी कर्मवीर कुमार यादव उर्फ मुन्ना यादव के रूप में हुई है। आरोपी ट्रेन छोड़कर बाजार में शराब पीने चला गया था।

ट्रेन संख्या 05278 डाउन सवारी गाड़ी सोमवार को 17.41 बजे हसनपुर रोड रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी। तभी उप चालक मुख्य चालक संतोष कुमार से अनुमति लेकर शराब पीने चला गया। हालांकि उसने कहा था कि वो टहलकर आता है। बाद में वो स्टेशन रोड स्थित दुर्गा मंदिर के निकट अंग्रेजी शराब की दुकान पर शराबी पीते मिले। मामले की जानकारी स्टेशन अधीक्षक को पता चली। इसी ट्रेन से सहरसा के ट्रेन चालक ऋतुराज कुमार भी यात्रा कर रहे थे। वे विशेष आग्रह पर उप चालक का प्रभार ग्रहण करके ट्रेन को आगे ले गए। जीआरपी थानाध्यक्ष श्यामदेव यादव के मुताबिक, मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के साथ ही उप चालक के विरुद्ध बिहार उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कुछ दिन पहले बिहार के ही सिवान में सिसवान ढाला में एक मामला सामने आया था। यहां ट्रेन के पायलट को चाय की तलब लगी। लिहाजा एक जगह ट्रेन रोक दी गई। अब यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। यह मामला ग्वालियर मेल एक्सप्रेस से जुड़ा था। ट्रेन का गार्ड नीचे उतरा। उसने पास की एक दुकान से चाय ली और फिर इंजन में जाकर बैठ गया। ट्रेन जिस जगह रोकी गई, वहां फाटक है। ऐसे में वाहनों को इंतजार करना पड़ा। ट्रेन 5 बजकर 30 मिनट पर सिवान स्टेशन से रवाना हुई। जिस जगह ट्रेन रोकी गई, वहां से ट्रेनों धीमी गति से गुजरती हैं। ट्रेन के पायलट ने इसका फायदा उठाया।

 

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