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Jharkhand Protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती; बोले “मेरी जान को गंभीर खतरा”

by Tarun Bhardwaj • August 7, 2026
Student leader Devendra Nath Mahto's health deteriorates

Jharkhand Protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती; बोले “मेरी जान को गंभीर खतरा”

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यूनिक समय, नई दिल्ली। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। आंदोलन के 14वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की शारीरिक स्थिति अत्यधिक बिगड़ने के बाद उन्हें त्वरित रूप से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक तरफ जहां छात्र लगातार सड़कों पर डटे हुए हैं और विधानसभा घेराव की तैयारी कर रहे हैं, वहीं इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है।

अस्पताल जाने से पहले छात्र नेता का सरकार पर बड़ा हमला

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराए जाने से पहले छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि यदि उनके स्वास्थ्य में और गिरावट आई तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों की ओर से सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नाम पहले ही सौंपा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की तरफ से अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रभावित छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और जांच में भी गड़बड़ियों की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद भी सरकार का ऐसा असंवेदनशील रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

AJSU की CBI जांच की मांग

छात्रों के इस आंदोलन को राजनीतिक दलों का भी भारी समर्थन मिल रहा है, जिसमें ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) ने सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के विधायक निर्मल महतो ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री इस पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच के आदेश नहीं देते, तब तक वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। इसके साथ ही विधायक ने वर्तमान में जांच कर रही राज्य एजेंसियों पर निष्पक्ष न होने और सरकार के साथ मिलीभगत में काम करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।

JMM का पलटवार

छात्रों के विरोध और विपक्ष के हमलावर रुख के बीच सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने खुलकर सरकार का बचाव किया है। इस दौरान JMM सांसद महुआ माजी ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सुनने में केंद्र सरकार को 25-30 दिन लग गए थे, जबकि इसके विपरीत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले दिन से ही छात्रों की बात को बेहद गंभीरता से सुना है। उन्होंने त्वरित कार्रवाई का ब्योरा देते हुए जोर देकर कहा कि सरकार ने चेयरमैन का इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही सीआईडी (CID) जांच के कड़े निर्देश दिए और कई आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की हैं, क्योंकि सरकार हर हाल में छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विधानसभा मार्च का ऐलान

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के खिलाफ चल रहा यह प्रदर्शन अब अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां आंदोलन के 14वें दिन भी छह छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर मजबूती से डटे हुए हैं। जारी आंदोलन के बीच दो प्रमुख छात्र संगठनों ने चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान राज्य विधानसभा तक विशाल मार्च निकालने का बड़ा ऐलान किया है। हालांकि गतिरोध समाप्त करने की दिशा में पहल करते हुए छात्रों ने 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भी गठित किया है, जो सरकार से सीधी और सार्थक वार्ता करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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