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Mathura News: बांके बिहारी मंदिर के पास 664 किलो दूषित पेड़ा नष्ट; 1 अप्रैल से लागू होंगे FSSAI के नए नियम

by Tarun Bhardwaj • March 30, 2026
664 kg of Contaminated Peda Destroyed Near Banke Bihari Temple

Mathura News: बांके बिहारी मंदिर के पास 664 किलो दूषित पेड़ा नष्ट; 1 अप्रैल से लागू होंगे FSSAI के नए नियम

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यूनिक समय, मथुरा। धर्मनगरी वृंदावन में श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले पेड़ा मिलावटखोरों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिलाधिकारी सीपी सिंह के कड़े निर्देशों के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने सोमवार को बांके बिहारी मंदिर और विद्यापीठ चौराहा क्षेत्र में सघन छापेमारी की।

इस कार्रवाई के दौरान दुकानों पर अस्वच्छ परिस्थितियों में रखे गए लगभग 664 किलोग्राम दूषित पेड़ा को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया, जिससे पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। विभाग की इस सक्रियता का मुख्य उद्देश्य विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को शुद्ध और सुरक्षित प्रसाद व खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी रीना शर्मा और उनकी टीम, जिसमें धर्मेंद्र, रामनरेश और मोहर सिंह शामिल थे, ने मंदिर के आसपास की विभिन्न दुकानों का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने पेड़ा के 6 अलग-अलग नमूने और मिल्क केक का 1 नमूना लेकर उन्हें तत्काल राजकीय खाद्य प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अकेले मार्च 2026 में अब तक बांके बिहारी क्षेत्र से 12 नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जा चुका है। अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि नमूनों की रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इसी बीच, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य कारोबारियों के लिए राहत और नियमन का एक नया युग शुरू करने की घोषणा की है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन ऐतिहासिक बदलावों के तहत अब खाद्य पंजीकरण और लाइसेंस बार-बार नवीनीकृत कराने की झंझट खत्म हो जाएगी, क्योंकि अब ये आजीवन या सतत वैध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने व्यापारियों की सुविधा के लिए पंजीकरण की सीमा को बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ वार्षिक टर्नओवर तक कर दिया है।

नए वर्गीकरण के अनुसार, ₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए राज्य लाइसेंस और ₹50 करोड़ से अधिक का व्यापार करने वालों के लिए केंद्रीय लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग का मानना है कि इन सरल नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारी स्वेच्छा से मानकों का पालन करेंगे।

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