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Mathura News: मलूकदास महाराज की जयंती पर मलूकपीठ आश्रम पहुंचे मोहन भागवत; सामाजिक एकता का बड़ा संदेश

by Tarun Bhardwaj • April 7, 2026
Mohan Bhagwat arrived at Malookpeeth Ashram

Mathura News: मलूकदास महाराज की जयंती पर मलूकपीठ आश्रम पहुंचे मोहन भागवत; सामाजिक एकता का बड़ा संदेश

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यूनिक समय, मथुरा। धर्मनगरी वृंदावन के ऐतिहासिक मलूकपीठ आश्रम में आज सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का आगमन हुआ। संत शिरोमणि जगद्गुरु मलूकदास महाराज की जयंती महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण की, बल्कि संतों की उपस्थिति में राष्ट्र और समाज की एकता का एक सशक्त संदेश भी साझा किया।

समाधि पूजन और दिव्य रज का स्पर्श

आश्रम पहुँचने के बाद मोहन भागवत ने सबसे पहले संत शिरोमणि मलूकदास महाराज की समाधि पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। आस्था से सराबोर संघ प्रमुख ने समाधि स्थल की दिव्य रज (धूल) को श्रद्धापूर्वक अपने माथे से लगाया और उसे ग्रहण भी किया। इस दौरान मलूकपीठाधीश्वर आचार्य राजेंद्रदास महाराज ने उन्हें ठाकुर जी की एक अत्यंत सुंदर छवि भेंट कर उनका अभिनंदन किया। यह मलूकपीठ आश्रम में संघ प्रमुख का प्रथम आगमन था, जिसे लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और संतों में भारी उत्साह देखा गया।

मंच से गूँजा एकता का मंत्र

मलूकपीठ आश्रम के भव्य मंच पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के प्रतिष्ठित संतों के साथ शिरकत की, जहाँ योग गुरु स्वामी रामदेव ने आध्यात्मिक चेतना पर जोर देते हुए समाज को नमन किया और गीतामनीषी ज्ञानानंद महाराज ने मलूकदास महाराज के दिव्य जीवन व शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए संघ प्रमुख का आत्मीय स्वागत किया। इस पावन अवसर पर संतों के सानिध्य में मानवता और राष्ट्र की एकता का मंत्र गूँजा, जो समाज को सही दिशा दिखाने और आपसी समरसता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बना।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संभावित उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा

इस महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। मथुरा कलेक्ट्रेट और पुलिस प्रशासन पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री के इस संभावित कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा हुआ है। मलूकपीठ आश्रम और आसपास के क्षेत्रों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि जयंती महोत्सव निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।

विरासत और विचार का संगम

संघ प्रमुख का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैचारिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संतों के सानिध्य में भागवत ने समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने की बात कही। मलूकदास महाराज, जो अपनी करुणा और ‘अजगर करै न चाकरी’ जैसे सिद्धांतों के लिए जाने जाते हैं, उनके दरबार से एकता का संदेश देना सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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